Regression Hypnosis: Difference between revisions
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< | <onlyinclude>'''Regression Hypnosis''' (Ho: रिग्रेसन हिप्नोसिस), जिसे '''Past Life Regression''' (पिछला जीवन रिग्रेसन) या '''पूर्व जन्म थेरपी''' के नाम से भी जाना जाता है, एक प्रकार का [[Hypnosis|हिप्नोसिस]] है जिसमें व्यक्ति को एक ट्रान्स की अवस्था में ले जाकर उसकी स्मृतियों को वर्तमान से पीछे, बचपन या कथित पूर्व जन्मों की ओर ले जाया जाता है। इसका उपयोग मानसिक तनाव, फोबिया, या असमझी हुई शारीरिक समस्याओं के मूल कारण को खोजने और उनका समाधान करने के लिए किया जाता है। भारत में, जहाँ पुनर्जन्म (Reincarnation) की अवधारणा धार्मिक और सांस्कृतिक विश्वासों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, इस थेरपी के प्रति एक विशेष रुचि और स्वीकार्यता देखी जाती है।</onlyinclude> | ||
'''Regression Hypnosis''' (Past Life Regression) | |||
== | == परिभाषा (Definition) == | ||
''' | रिग्रेसन हिप्नोसिस एक ऐसी विधि है जिसमें '''हिप्नोथेरेपिस्ट''' व्यक्ति को एक गहरी, आरामदायक और केंद्रित मानसिक अवस्था में ले जाता है। इस अवस्था में व्यक्ति की चेतना का स्तर बदल जाता है और वह अपनी अवचेतन मन तक पहुँच प्राप्त कर सकता है। इस प्रक्रिया में व्यक्ति से उसके अतीत की घटनाओं को फिर से जीने या याद करने के लिए कहा जाता है। यह अतीत '''आयु रिग्रेसन''' (Age Regression) में वर्तमान जीवन का बचपन हो सकता है, या '''पास्ट लाइफ रिग्रेसन''' में कथित पूर्व जन्मों का समय। माना जाता है कि वर्तमान समस्याओं की जड़ें अक्सर इन्हीं भूली हुई या दबी हुई यादों में छिपी होती हैं। | ||
== | == इतिहास (History) == | ||
आधुनिक रिग्रेसन हिप्नोसिस का इतिहास कुछ महत्वपूर्ण व्यक्तियों से जुड़ा है जिन्होंने इसे लोकप्रिय बनाया। | |||
''' | '''मोरे बर्नस्टीन''' (Morey Bernstein): 1950 के दशक में, अमेरिकी व्यवसायी और हिप्नोटिस्ट मोरे बर्नस्टीन ने एक महिला "रूथ सिमंस" (जिसे उन्होंने "ब्राइडी मर्फी" का छद्म नाम दिया) पर पास्ट लाइफ रिग्रेसन किया। इस सत्र का विवरण उनकी 1956 की पुस्तक '''"द सर्च फॉर ब्राइडी मर्फी"''' में मिलता है। यह पुस्तक एक बड़ी सनसनी बनी और पश्चिमी दुनिया में पूर्व जन्म की अवधारणा पर चर्चा को बढ़ावा दिया। | ||
''' | '''ब्रायन वीस''' (Brian Weiss): एक अमेरिकी मनोचिकित्सक जिन्होंने 1980 के दशक में पारंपरिक मनोचिकित्सा का अभ्यास करते हुए अपनी मरीज "कैथरीन" के साथ रिग्रेसन थेरपी शुरू की। उनके अनुसार, कैथरीन के पूर्व जन्मों की यादों ने उसकी वर्तमान मानसिक समस्याओं को ठीक करने में मदद की। उनकी पुस्तक '''"मेनी लाइव्स, मेनी मास्टर्स"''' (1988) ने इस विधा को वैज्ञानिक और चिकित्सीय दृष्टिकोण से एक नई पहचान दी। | ||
''' | '''माइकल न्यूटन''' (Michael Newton): एक हिप्नोथेरेपिस्ट जिन्होंने '''लाइफ बिटवीन लाइव्स''' (LBL) या "जीवनों के बीच का जीवन" रिग्रेसन पर काम किया। उनकी विधि व्यक्ति को मृत्यु के बाद के अनुभव और दो जन्मों के बीच की आत्मिक अवस्था में ले जाने पर केंद्रित है। उनकी पुस्तकें '''"जर्नी ऑफ सोल्स"''' और '''"डेस्टिनी ऑफ सोल्स"''' बहुत प्रभावशाली रही हैं। | ||
''' | '''डोलोरेस कैनन''' (Dolores Cannon): एक अमेरिकी हिप्नोथेरेपिस्ट जिन्होंने अपनी '''"क्यूएचएचटी"''' (क्वांटम हीलिंग हिप्नोसिस टेक्निक) विधि विकसित की। उन्होंने हजारों रिग्रेसन सत्र किए और पूर्व जन्मों, अंतरिक्ष जीवन, और पृथ्वी के इतिहास से जुड़े विस्तृत विवरण दर्ज किए। उनके कार्य ने इस क्षेत्र को एक आध्यात्मिक और दार्शनिक आयाम दिया। | ||
== | == कार्यप्रणाली (Methodology) == | ||
रिग्रेसन हिप्नोसिस की एक सामान्य सत्र में निम्नलिखित चरण शामिल होते हैं: | |||
# '''पूर्व-चर्चा''': थेरेपिस्ट और ग्राहक के बीच समस्या, अपेक्षाओं और प्रक्रिया के बारे में विस्तृत बातचीत। | |||
# '''आरम्भन (Induction)''': गहरी साँस लेने, शरीर को आराम देने और ध्यान केंद्रित करने की तकनीकों के माध्यम से व्यक्ति को एक हल्के ट्रान्स अवस्था में लाना। | |||
# '''रिग्रेसन''': व्यक्ति को मानसिक रूप से समय में पीछे ले जाना। थेरेपिस्ट मार्गदर्शन देता है, जैसे "अब आप एक दरवाजे के सामने हैं, उसे खोलिए... आप स्वयं को कहाँ पाते हैं?"। | |||
# '''अनुभव और अन्वेषण''': व्यक्ति जो देखता, सुनता या महसूस करता है, उसका वर्णन करता है। थेरेपिसट उस अनुभव से जुड़ी भावनाओं और शारीरिक संवेदनाओं को समझने में मदद करता है। | |||
# '''समापन और एकीकरण''': सत्र के अंत में, व्यक्ति को वर्तमान में वापस लाया जाता है। अनुभवों पर चर्चा की जाती है और वर्तमान जीवन से उनका संबंध समझा जाता है। | |||
== प्रकार (Types) == | |||
'''आयु रिग्रेसन (Age Regression)''': इसमें व्यक्ति को उसके वर्तमान जीवन के पिछले पलों, विशेष रूप से बचपन की ओर ले जाया जाता है। इसका उद्देश्य दबी हुई यादों, आघात या ऐसी घटनाओं को याद करना है जो वर्तमान व्यवहार को प्रभावित कर रही हैं। | |||
'''पास्ट लाइफ रिग्रेसन (Past Life Regression - PLR)''': यह सबसे अधिक चर्चित प्रकार है। इसमें व्यक्ति को उसके वर्तमान जन्म से पहले के जीवन में ले जाने का दावा किया जाता है। लोग अक्सर खुद को एक अलग ऐतिहासिक या सांस्कृतिक परिवेश में, एक अलग व्यक्ति के रूप में अनुभव करते हैं। | |||
'''लाइफ बिटवीन लाइव्स रिग्रेसन (Life Between Lives Regression - LBL)''': माइकल न्यूटन द्वारा लोकप्रिय यह विधि, मृत्यु के बाद के अनुभव पर केंद्रित है। इसमें आत्मा की यात्रा, "प्रकाश" से मिलन, आत्मिक मार्गदर्शकों से बातचीत, और अगले जन्म की योजना बनाने जैसे अनुभव शामिल हो सकते हैं। | |||
== वैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य (Scientific perspective) == | |||
वैज्ञानिक समुदाय रिग्रेसन हिप्नोसिस, विशेष रूप से पास्ट लाइफ रिग्रेसन के प्रति आलोचनात्मक दृष्टिकोण रखता है। मुख्य आलोचनाएँ यह हैं कि हिप्नोसिस की अवस्था में व्यक्ति की '''सुझाव-ग्राहिता (suggestibility)''' बहुत बढ़ जाती है। थेरेपिस्ट के प्रश्नों, या फिल्मों, किताबों, कहानियों से मिली जानकारी से व्यक्ति का अवचेतन मन काल्पनिक विवरण गढ़ सकता है, जिसे वह एक वास्तविक याद्दाश्त समझने लगता है। इसे '''क्रिप्टोम्नेसिया''' कहा जाता है। अधिकांश वैज्ञानिक इन "यादों" को मस्तिष्क की रचनात्मक कल्पना का परिणाम मानते हैं, न कि पूर्व जन्म का प्रमाण। हालाँकि, आयु रिग्रेसन के माध्यम से बचपन की दबी यादों को पुनः प्राप्त करने की क्षमता पर कुछ शोध हुए हैं, लेकिन यह भी विवादास्पद है क्योंकि हिप्नोसिस में गढ़ी हुई यादें भी वास्तविक लग सकती हैं। | |||
== | == पुनर्जन्म शोध (Reincarnation research) == | ||
पुनर्जन्म के दावों का अध्ययन करने वाले शोधकर्ताओं ने, जैसे कि डॉ. इयान स्टीवेन्सन (University of Virginia), भारत सहित कई देशों में ऐसे बच्चों के मामलों को दर्ज किया है जो स्वतः ही पूर्व जन्म की बातें करते हैं। इन मामलों में बच्चे अक्सर विस्तृत विवरण देते हैं—जैसे नाम, स्थान, परिवार—जिनकी पुष्टि एक ऐसे व्यक्ति से मेल खाती है जिसकी मृत्यु हो चुकी है। ये शोध रिग्रेसन हिप्नोसिस से अलग हैं, क्योंकि इनमें बच्चे बिना किसी हिप्नोसिस के स्वतः ही ये बातें करते हैं। भारत में, ऐसे कई प्रसिद्ध मामले सामने आए हैं, जो सांस्कृतिक रूप से पुनर्जन्म में विश्वास को मजबूत करते हैं। हालाँकि, वैज्ञानिक इन निष्कर्षों को भी अंतिम रूप से स्वीकार नहीं करते और संभावित त्रुटियों की ओर इशारा करते हैं। | |||
== भारत में अभ्यास (Practice in India) == | |||
भारत में, '''पुनर्जन्म''' और '''कर्म''' की अवधारणाएँ हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख धर्मों में गहराई से निहित हैं। इसलिए, पास्ट लाइफ रिग्रेसन के विचार के प्रति एक स्वाभाविक जिज्ञासा और खुलापन मौजूद है। यहाँ इसका अभ्यास दो प्रमुख रूपों में देखने को मिलता है: | |||
'''पारंपरिक/आध्यात्मिक दृष्टिकोण''': कई आध्यात्मिक गुरु और योग शिक्षक इसे आत्म-ज्ञान और कर्मिक बंधनों से मुक्ति का एक मार्ग मानते हैं। इसे अक्सर एक आध्यात्मिक खोज के रूप में देखा जाता है, न कि केवल एक चिकित्सीय उपकरण के रूप में। | |||
'''आधुनिक चिकित्सीय दृष्टिकोण''': बड़े शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई में प्रमाणित हिप्नोथेरेपिस्ट हैं जो रिग्रेसन थेरपी की पश्चिमी शैली का अभ्यास करते हैं। वे इसे चिंता, अवसाद, रिश्तों की समस्याओं और फोबिया के इलाज के लिए एक वैकल्पिक चिकित्सा के रूप में पेश करते हैं। | |||
भारत में कुछ जाने-माने व्यवसायी और केंद्र हैं जो इस क्षेत्र में सक्रिय हैं, हालाँकि यह अभी भी एक उभरता हुआ क्षेत्र है। कई थेरेपिस्ट ब्रायन वीस या डोलोरेस कैनन की विधियों को भारतीय दर्शन के साथ जोड़कर अपना अनूठा तरीका विकसित करते हैं। | |||
== कानूनी और नैतिक विचार (Legal and ethical considerations) == | |||
भारत में, हिप्नोथेरेपी या रिग्रेसन थेरपी के लिए कोई एक केंद्रीय विनियामक संस्था नहीं है। इसलिए '''अभ्यासी की योग्यता और नैतिकता''' पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। कुछ महत्वपूर्ण बिंदु: | |||
* '''योग्यता''': ग्राहक को यह जांचना चाहिए कि थेरेपिस्ट किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से हिप्नोथेरेपी में प्रशिक्षित है या नहीं। मनोविज्ञान, चिकित्सा या समाज कार्य की पृष्ठभूमि एक अतिरिक्त लाभ है। | |||
* '''झूठे दावे''': किसी भी थेरेपिस्ट से सावधान रहना चाहिए जो रोगों के "चमत्कारी इलाज" या भविष्य देखने का दावा करता है। | |||
* '''भावनात्मक संवेदनशीलता''': रिग्रेसन शक्तिशाली और भावनात्मक रूप से उथल-पुथल | |||
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Revision as of 15:40, 1 April 2026
Regression Hypnosis (Ho: रिग्रेसन हिप्नोसिस), जिसे Past Life Regression (पिछला जीवन रिग्रेसन) या पूर्व जन्म थेरपी के नाम से भी जाना जाता है, एक प्रकार का हिप्नोसिस है जिसमें व्यक्ति को एक ट्रान्स की अवस्था में ले जाकर उसकी स्मृतियों को वर्तमान से पीछे, बचपन या कथित पूर्व जन्मों की ओर ले जाया जाता है। इसका उपयोग मानसिक तनाव, फोबिया, या असमझी हुई शारीरिक समस्याओं के मूल कारण को खोजने और उनका समाधान करने के लिए किया जाता है। भारत में, जहाँ पुनर्जन्म (Reincarnation) की अवधारणा धार्मिक और सांस्कृतिक विश्वासों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, इस थेरपी के प्रति एक विशेष रुचि और स्वीकार्यता देखी जाती है।
परिभाषा (Definition)
रिग्रेसन हिप्नोसिस एक ऐसी विधि है जिसमें हिप्नोथेरेपिस्ट व्यक्ति को एक गहरी, आरामदायक और केंद्रित मानसिक अवस्था में ले जाता है। इस अवस्था में व्यक्ति की चेतना का स्तर बदल जाता है और वह अपनी अवचेतन मन तक पहुँच प्राप्त कर सकता है। इस प्रक्रिया में व्यक्ति से उसके अतीत की घटनाओं को फिर से जीने या याद करने के लिए कहा जाता है। यह अतीत आयु रिग्रेसन (Age Regression) में वर्तमान जीवन का बचपन हो सकता है, या पास्ट लाइफ रिग्रेसन में कथित पूर्व जन्मों का समय। माना जाता है कि वर्तमान समस्याओं की जड़ें अक्सर इन्हीं भूली हुई या दबी हुई यादों में छिपी होती हैं।
इतिहास (History)
आधुनिक रिग्रेसन हिप्नोसिस का इतिहास कुछ महत्वपूर्ण व्यक्तियों से जुड़ा है जिन्होंने इसे लोकप्रिय बनाया।
मोरे बर्नस्टीन (Morey Bernstein): 1950 के दशक में, अमेरिकी व्यवसायी और हिप्नोटिस्ट मोरे बर्नस्टीन ने एक महिला "रूथ सिमंस" (जिसे उन्होंने "ब्राइडी मर्फी" का छद्म नाम दिया) पर पास्ट लाइफ रिग्रेसन किया। इस सत्र का विवरण उनकी 1956 की पुस्तक "द सर्च फॉर ब्राइडी मर्फी" में मिलता है। यह पुस्तक एक बड़ी सनसनी बनी और पश्चिमी दुनिया में पूर्व जन्म की अवधारणा पर चर्चा को बढ़ावा दिया।
ब्रायन वीस (Brian Weiss): एक अमेरिकी मनोचिकित्सक जिन्होंने 1980 के दशक में पारंपरिक मनोचिकित्सा का अभ्यास करते हुए अपनी मरीज "कैथरीन" के साथ रिग्रेसन थेरपी शुरू की। उनके अनुसार, कैथरीन के पूर्व जन्मों की यादों ने उसकी वर्तमान मानसिक समस्याओं को ठीक करने में मदद की। उनकी पुस्तक "मेनी लाइव्स, मेनी मास्टर्स" (1988) ने इस विधा को वैज्ञानिक और चिकित्सीय दृष्टिकोण से एक नई पहचान दी।
माइकल न्यूटन (Michael Newton): एक हिप्नोथेरेपिस्ट जिन्होंने लाइफ बिटवीन लाइव्स (LBL) या "जीवनों के बीच का जीवन" रिग्रेसन पर काम किया। उनकी विधि व्यक्ति को मृत्यु के बाद के अनुभव और दो जन्मों के बीच की आत्मिक अवस्था में ले जाने पर केंद्रित है। उनकी पुस्तकें "जर्नी ऑफ सोल्स" और "डेस्टिनी ऑफ सोल्स" बहुत प्रभावशाली रही हैं।
डोलोरेस कैनन (Dolores Cannon): एक अमेरिकी हिप्नोथेरेपिस्ट जिन्होंने अपनी "क्यूएचएचटी" (क्वांटम हीलिंग हिप्नोसिस टेक्निक) विधि विकसित की। उन्होंने हजारों रिग्रेसन सत्र किए और पूर्व जन्मों, अंतरिक्ष जीवन, और पृथ्वी के इतिहास से जुड़े विस्तृत विवरण दर्ज किए। उनके कार्य ने इस क्षेत्र को एक आध्यात्मिक और दार्शनिक आयाम दिया।
कार्यप्रणाली (Methodology)
रिग्रेसन हिप्नोसिस की एक सामान्य सत्र में निम्नलिखित चरण शामिल होते हैं:
- पूर्व-चर्चा: थेरेपिस्ट और ग्राहक के बीच समस्या, अपेक्षाओं और प्रक्रिया के बारे में विस्तृत बातचीत।
- आरम्भन (Induction): गहरी साँस लेने, शरीर को आराम देने और ध्यान केंद्रित करने की तकनीकों के माध्यम से व्यक्ति को एक हल्के ट्रान्स अवस्था में लाना।
- रिग्रेसन: व्यक्ति को मानसिक रूप से समय में पीछे ले जाना। थेरेपिस्ट मार्गदर्शन देता है, जैसे "अब आप एक दरवाजे के सामने हैं, उसे खोलिए... आप स्वयं को कहाँ पाते हैं?"।
- अनुभव और अन्वेषण: व्यक्ति जो देखता, सुनता या महसूस करता है, उसका वर्णन करता है। थेरेपिसट उस अनुभव से जुड़ी भावनाओं और शारीरिक संवेदनाओं को समझने में मदद करता है।
- समापन और एकीकरण: सत्र के अंत में, व्यक्ति को वर्तमान में वापस लाया जाता है। अनुभवों पर चर्चा की जाती है और वर्तमान जीवन से उनका संबंध समझा जाता है।
प्रकार (Types)
आयु रिग्रेसन (Age Regression): इसमें व्यक्ति को उसके वर्तमान जीवन के पिछले पलों, विशेष रूप से बचपन की ओर ले जाया जाता है। इसका उद्देश्य दबी हुई यादों, आघात या ऐसी घटनाओं को याद करना है जो वर्तमान व्यवहार को प्रभावित कर रही हैं।
पास्ट लाइफ रिग्रेसन (Past Life Regression - PLR): यह सबसे अधिक चर्चित प्रकार है। इसमें व्यक्ति को उसके वर्तमान जन्म से पहले के जीवन में ले जाने का दावा किया जाता है। लोग अक्सर खुद को एक अलग ऐतिहासिक या सांस्कृतिक परिवेश में, एक अलग व्यक्ति के रूप में अनुभव करते हैं।
लाइफ बिटवीन लाइव्स रिग्रेसन (Life Between Lives Regression - LBL): माइकल न्यूटन द्वारा लोकप्रिय यह विधि, मृत्यु के बाद के अनुभव पर केंद्रित है। इसमें आत्मा की यात्रा, "प्रकाश" से मिलन, आत्मिक मार्गदर्शकों से बातचीत, और अगले जन्म की योजना बनाने जैसे अनुभव शामिल हो सकते हैं।
वैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य (Scientific perspective)
वैज्ञानिक समुदाय रिग्रेसन हिप्नोसिस, विशेष रूप से पास्ट लाइफ रिग्रेसन के प्रति आलोचनात्मक दृष्टिकोण रखता है। मुख्य आलोचनाएँ यह हैं कि हिप्नोसिस की अवस्था में व्यक्ति की सुझाव-ग्राहिता (suggestibility) बहुत बढ़ जाती है। थेरेपिस्ट के प्रश्नों, या फिल्मों, किताबों, कहानियों से मिली जानकारी से व्यक्ति का अवचेतन मन काल्पनिक विवरण गढ़ सकता है, जिसे वह एक वास्तविक याद्दाश्त समझने लगता है। इसे क्रिप्टोम्नेसिया कहा जाता है। अधिकांश वैज्ञानिक इन "यादों" को मस्तिष्क की रचनात्मक कल्पना का परिणाम मानते हैं, न कि पूर्व जन्म का प्रमाण। हालाँकि, आयु रिग्रेसन के माध्यम से बचपन की दबी यादों को पुनः प्राप्त करने की क्षमता पर कुछ शोध हुए हैं, लेकिन यह भी विवादास्पद है क्योंकि हिप्नोसिस में गढ़ी हुई यादें भी वास्तविक लग सकती हैं।
पुनर्जन्म शोध (Reincarnation research)
पुनर्जन्म के दावों का अध्ययन करने वाले शोधकर्ताओं ने, जैसे कि डॉ. इयान स्टीवेन्सन (University of Virginia), भारत सहित कई देशों में ऐसे बच्चों के मामलों को दर्ज किया है जो स्वतः ही पूर्व जन्म की बातें करते हैं। इन मामलों में बच्चे अक्सर विस्तृत विवरण देते हैं—जैसे नाम, स्थान, परिवार—जिनकी पुष्टि एक ऐसे व्यक्ति से मेल खाती है जिसकी मृत्यु हो चुकी है। ये शोध रिग्रेसन हिप्नोसिस से अलग हैं, क्योंकि इनमें बच्चे बिना किसी हिप्नोसिस के स्वतः ही ये बातें करते हैं। भारत में, ऐसे कई प्रसिद्ध मामले सामने आए हैं, जो सांस्कृतिक रूप से पुनर्जन्म में विश्वास को मजबूत करते हैं। हालाँकि, वैज्ञानिक इन निष्कर्षों को भी अंतिम रूप से स्वीकार नहीं करते और संभावित त्रुटियों की ओर इशारा करते हैं।
भारत में अभ्यास (Practice in India)
भारत में, पुनर्जन्म और कर्म की अवधारणाएँ हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख धर्मों में गहराई से निहित हैं। इसलिए, पास्ट लाइफ रिग्रेसन के विचार के प्रति एक स्वाभाविक जिज्ञासा और खुलापन मौजूद है। यहाँ इसका अभ्यास दो प्रमुख रूपों में देखने को मिलता है:
पारंपरिक/आध्यात्मिक दृष्टिकोण: कई आध्यात्मिक गुरु और योग शिक्षक इसे आत्म-ज्ञान और कर्मिक बंधनों से मुक्ति का एक मार्ग मानते हैं। इसे अक्सर एक आध्यात्मिक खोज के रूप में देखा जाता है, न कि केवल एक चिकित्सीय उपकरण के रूप में।
आधुनिक चिकित्सीय दृष्टिकोण: बड़े शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई में प्रमाणित हिप्नोथेरेपिस्ट हैं जो रिग्रेसन थेरपी की पश्चिमी शैली का अभ्यास करते हैं। वे इसे चिंता, अवसाद, रिश्तों की समस्याओं और फोबिया के इलाज के लिए एक वैकल्पिक चिकित्सा के रूप में पेश करते हैं।
भारत में कुछ जाने-माने व्यवसायी और केंद्र हैं जो इस क्षेत्र में सक्रिय हैं, हालाँकि यह अभी भी एक उभरता हुआ क्षेत्र है। कई थेरेपिस्ट ब्रायन वीस या डोलोरेस कैनन की विधियों को भारतीय दर्शन के साथ जोड़कर अपना अनूठा तरीका विकसित करते हैं।
कानूनी और नैतिक विचार (Legal and ethical considerations)
भारत में, हिप्नोथेरेपी या रिग्रेसन थेरपी के लिए कोई एक केंद्रीय विनियामक संस्था नहीं है। इसलिए अभ्यासी की योग्यता और नैतिकता पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। कुछ महत्वपूर्ण बिंदु:
- योग्यता: ग्राहक को यह जांचना चाहिए कि थेरेपिस्ट किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से हिप्नोथेरेपी में प्रशिक्षित है या नहीं। मनोविज्ञान, चिकित्सा या समाज कार्य की पृष्ठभूमि एक अतिरिक्त लाभ है।
- झूठे दावे: किसी भी थेरेपिस्ट से सावधान रहना चाहिए जो रोगों के "चमत्कारी इलाज" या भविष्य देखने का दावा करता है।
- भावनात्मक संवेदनशीलता: रिग्रेसन शक्तिशाली और भावनात्मक रूप से उथल-पुथल