सम्मोहन: Difference between revisions
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'''सम्मोहन''' (Hypnosis) एक मानसिक अवस्था या प्रक्रिया हे जिसमें व्यक्ति की एकाग्रता बढ़ी हुई, सुझावशीलता बढ़ी हुई रहती हे और परिधीय जागरूकता कम होती हे। इसे अक्सर '''सम्मोहन चिकित्सा''' के रूप में चिकित्सीय उद्देश्यों के लिए प्रयोग किया जाता हे, जहाँ एक प्रशिक्षित व्यक्ति (सम्मोहनकर्ता) दूसरे व्यक्ति (विषय) को मौखिक सुझाव और कल्पनाओं के माध्यम से इस अवस्था में ले जाता हे। भारत में, विशेषकर [[शेखावाटी]] क्षेत्र में, इसे कभी-कभी "मन की नींद" या "जागृत तंद्रा" के रूप में भी जाना जाता हे। | |||
== परिभाषा == | == परिभाषा == | ||
सम्मोहन एक ऐसी प्रक्रिया हे जिसमें एक व्यक्ति (सम्मोहनकर्ता) दूसरे व्यक्ति (विषय) को मानसिक रूप से विश्रांत और केंद्रित अवस्था में पहुँचाने के लिए मौखिक सुझाव और दृश्य-कल्पना का उपयोग करता हे। इस अवस्था को '''सम्मोहन तंद्रा''' (trance) कहते हैं। यह नींद नहीं हे, बल्कि एक ऐसी अवस्था हे जहाँ व्यक्ति का ध्यान इतना केंद्रित हो जाता हे कि बाहरी विकर्षण महत्वहीन लगने लगते हैं। इस अवस्था में, व्यक्ति की '''सुझावशीलता''' (suggestibility) बढ़ जाती हे, जिसका अर्थ हे कि वह चिकित्सीय सुझावों को गहराई से स्वीकार और प्रसंस्करण कर सकता हे। भारतीय संदर्भ में, इसे अक्सर '''ध्यान''' की एक गहन अवस्था से जोड़कर देखा जाता हे, हालाँकि दोनों में अंतर हे। सम्मोहन में एक बाहरी मार्गदर्शक होता हे, जबकि ध्यान आम तौर पर आत्म-निर्देशित होता हे। | |||
== इतिहास == | == इतिहास == | ||
=== | === विश्व में === | ||
सम्मोहन के आधुनिक इतिहास की शुरुआत 18वीं सदी में जर्मन चिकित्सक '''फ्रांज एंटन मेस्मर''' के सिद्धांतों से हुई, जिन्होंने "पशु चुंबकत्व" (animal magnetism) की अवधारणा दी। बाद में, 19वीं सदी में स्कॉटिश सर्जन '''जेम्स ब्रेड''' ने इस प्रक्रिया का नाम "हिप्नोसिस" (ग्रीक नींद देवता हिप्नोस के नाम पर) रखा और इसे एक मनोवैज्ञानिक घटना के रूप में समझाने का प्रयास किया। 20वीं सदी में, '''मिल्टन एच. एरिक्सन''' ने चिकित्सीय सम्मोहन को एक नया आयाम दिया, जिसका प्रभाव आज भी दिखता हे। | |||
=== भारत | === भारत एवं शेखावाटी क्षेत्र में === | ||
भारत में | भारत में सम्मोहन की अवधारणा नई नहीं हे। प्राचीन ग्रंथों और योगिक परंपराओं में '''तंत्र-मंत्र''', '''दृष्टि स्थापन''' (टकटकी) और '''समाधि''' जैसी अवस्थाओं का वर्णन मिलता हे, जिनमें सम्मोहन जैसे तत्व देखे जा सकते हैं। शेखावाटी क्षेत्र (झुंझुनू, सीकर, चुरू) की लोककथाओं और मौखिक इतिहास में भी ऐसे किस्से मिलते हैं जहाँ सिद्ध पुरुष या '''बाबा''' लोगों को अपनी दृष्टि या वचनों से प्रभावित करते थे। आधुनिक चिकित्सीय सम्मोहन की शुरुआत भारत में 20वीं सदी के मध्य में हुई। राजस्थान में, विशेषकर जयपुर और कोटा जैसे शहरों में, चिकित्सकों ने इसे एक चिकित्सीय उपकरण के रूप में अपनाना शुरू किया। शेखावाटी में, पारंपरिक मान्यताओं के कारण शुरू में इसे संदेह की नज़र से देखा गया, लेकिन धीरे-धीरे शहरी क्षेत्रों में इसकी स्वीकार्यता बढ़ी। | ||
== प्रकार == | == प्रकार == | ||
सम्मोहन को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बाँटा जा सकता हे: | |||
== वैज्ञानिक | '''पारंपरिक/प्रत्यक्ष सम्मोहन (Traditional/Direct Hypnosis):''' इसमें सम्मोहनकर्ता सीधे, आदेशात्मक भाषा का प्रयोग करता हे। उदाहरण: "आपकी आँखें भारी हो रही हैं... आप सो रहे हैं।" यह विधि अक्सर मंच प्रदर्शनों में देखी जाती हे। | ||
'''एरिक्सोनियन/अप्रत्यक्ष सम्मोहन (Ericksonian/Indirect Hypnosis):''' इसके संस्थापक मिल्टन एरिक्सन थे। इसमें कहानियों, रूपकों और अनुमानित भाषा का उपयोग करके व्यक्ति को सम्मोहन अवस्था में ले जाया जाता हे। यह विधि चिकित्सा में अधिक प्रचलित हे। | |||
इसके अलावा, अन्य प्रकार भी हैं: | |||
* '''स्व-सम्मोहन (Self-Hypnosis):''' जहाँ व्यक्ति खुद को सम्मोहन अवस्था में ले जाता हे। यह तनाव प्रबंधन और आत्म-सुधार के लिए लोकप्रिय हे। | |||
* '''[[प्रतिगमन सम्मोहन]] (Regression Hypnosis):''' इसका उपयोग अतीत की यादों, विशेषकर बचपन या पूर्वजन्म की कथित यादों तक पहुँचने के लिए किया जाता हे। भारत में, पूर्वजन्म सम्मोहन का विषय विशेष रुचि और विवाद दोनों पैदा करता हे। | |||
* '''सम्मोहन-औषधि (Hypnoanesthesia):''' दर्द निवारण या बिना दवा के संज्ञाहरण के लिए प्रयोग किया जाता हे, जैसे दंत चिकित्सा या प्रसव में। | |||
== वैज्ञानिक अनुसंधान == | |||
सम्मोहन एक वैज्ञानिक रूप से मान्यता प्राप्त घटना हे। '''भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR)''' और '''राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान (NIMHANS)''' जैसे संस्थानों में इस पर शोध हुआ हे। मस्तिष्क इमेजिंग (fMRI, EEG) अध्ययनों से पता चला हे कि सम्मोहन की अवस्था में मस्तिष्क की गतिविधि में परिवर्तन होते हैं, विशेषकर '''डिफॉल्ट मोड नेटवर्क''' और '''किंकुएट कॉर्टेक्स''' में। यह दर्शाता हे कि यह केवल कल्पना या सहमति नहीं, बल्कि एक वास्तविक न्यूरोलॉजिकल अवस्था हे। | |||
वैज्ञानिक सहमति हे कि सम्मोहन से '''दर्द प्रबंधन''' (क्रोनिक पेन, इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम), '''चिंता''', '''अवसाद''', '''धूम्रपान छुड़ाना''', और '''वजन नियंत्रण''' जैसी स्थितियों में मदद मिल सकती हे। हालाँकि, यह एक "जादू की छड़ी" नहीं हे और इसकी सफलता व्यक्ति की सुझावशीलता और सम्मोहनकर्ता की कुशलता पर निर्भर करती हे। | |||
== अनुप्रयोग == | == अनुप्रयोग == | ||
भारत में सम्मोहन के अनुप्रयोग विविध हैं: | |||
* ''' | * '''चिकित्सीय अनुप्रयोग:''' मनोचिकित्सक, मनोवैज्ञानिक और कुझ� चिकित्सक इसे मानसिक स्वास्थ्य उपचार के एक भाग के रूप में प्रयोग करते हैं। '''अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS)''' और '''पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER)''' जैसे संस्थानों में इस पर काम होता हे। | ||
* '''दंत चिकित्सा:''' कुछ दंत चिकित्सक दर्द के भय और घबराहट को कम करने के लिए सम्मोहन का उपयोग करते हैं। | |||
* ''' | * '''शिक्षा एवं खेल:''' छात्रों में एकाग्रता बढ़ाने और खिलाड़ियों में प्रदर्शन चिंता कम करने के लिए। | ||
* '''शिक्षा | * '''व्यसन उपचार:''' शराब और तंबाकू की लत छुड़ाने में सहायक। | ||
* ''' | * '''फोरेंसिक सम्मोहन:''' कानून प्रवर्तन एजेंसियाँ कभी-कभी गवाहों की याददाश्त बढ़ाने के लिए इसका प्रयोग करती हैं, हालाँकि यह विवादास्पद हे और इसकी विश्वसनीयता पर सवाल हे। | ||
== भारत में कानूनी स्थिति == | == भारत में कानूनी स्थिति == | ||
भारत में | भारत में सम्मोहन की कानूनी स्थिति स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं हे। '''भारतीय चिकित्सा परिषद (MCI)''' या '''राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC)''' ने सम्मोहन चिकित्सा के लिए अलग से कोई विशेष मान्यता या डिग्री जारी नहीं की हे। हालाँकि, पंजीकृत चिकित्सक (एमबीबीएस) और पंजीकृत क्लिनिकल मनोवैज्ञानिक अपने अभ्यास के हिस्से के रूप में सम्मोहन का उपयोग कर सकते हैं। | ||
'''मंच सम्मोहन''' (Stage Hypnosis) के लिए कोई राष्ट्रीय कानून नहीं हे, लेकिन कुछ राज्यों में मनोरंजन के लिए इसके प्रदर्शन पर प्रतिबंध या नियम हो सकते हैं। '''छल या नुकसान''' पहुँचाने के इरादे से सम्मोहन का उपयोग भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420 (छल) और अन्य प्रावधानों के तहत दंडनीय होगा। '''पूर्वजन्म सम्मोहन''' जैसी प्रथाओं को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी जाती हे, क्योंकि इनका दुरुपयोग हो सकता हे। | |||
== सांस्कृतिक दृष्टिकोण == | == सांस्कृतिक दृष्टिकोण == | ||
शेखावाटी और भारत के अन्य भागों में सम्मोहन के प्रति दृष्टिकोण मिश्रित हे। एक ओर, शहरी, शिक्षित वर्ग इसे एक '''वैज्ञानिक चिकित्सीय उपकरण''' के रूप में देखता हे। दूसरी ओर, ग्रामीण और पारंपरिक समुदायों में इसे कभी-कभी '''जादू-टोना''', '''भ्रम''' या '''अंधविश्वास''' से जोड़कर देखा जाता हे। धार्मिक संदर्भ में, कुछ लोग इसे आध्यात्मिक प्रथाओं (जैसे साधना, ध्यान) के करीब मानते हैं, तो कुछ इसे अप्राकृतिक और संदेहास्पद। | |||
मीडिया (टीवी शो और फिल्मों) में सम्मोहन को अक्सर रहस्यमय और अतिशयोक्तिपूर्ण तरीके से दिखाया जाता हे, जो जनता की धारणा को प्रभावित करता हे। शेखावाटी की मजबूत सामुदायिक और पारिवारिक संरचना के कारण, कोई भी नई चिकित्सा पद्धति अपनाने से पहले परिवार के बुजुर्गों या स्थानीय चिकित्सक की राय ली जाती हे। | |||
== भारत के उल्लेखनीय व्यवसायी == | |||
* '''डॉ. बी. एम. हेगड़े:''' प्रख्यात चिकित्सक और शिक्षाविद् ने चिकित्सा में सम्मोहन के संभावित उपयोगों पर लिखा हे। | |||
* '''डॉ. जे. आर. कीठ:''' मुंबई के एक प्रसिद्ध मनोचिकित्सक जिन्होंने भारत में चिकित्सीय सम्मोहन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। | |||
* '''डॉ. नरेश कुमार मित्तल:''' दिल्ली के एक मनोचिकित्सक जो सम्मोहन-औषधि (हिप्नोएनेस्थीसिया) में विशेषज्ञ हैं। | |||
* '''डॉ. (श्रीमती) सुनीता महेश्वरी:''' जयपुर की एक मनोचिकित्सक जिन्होंने राजस्थान में चिकित्सीय सम्मोहन के प्रति जागरूकता फैलाने का काम किया हे। | |||
* '''भारतीय सम्मोहन एवं सम्मोहन चिकित्सा संस्थान (IAHT), कोलकाता:''' एक प्रमुख संस्थान जो सम्मोहन में प्रशिक्षण और प्रमाणन प्रदान करता हे। | |||
* '''राष्ट्रीय सम्मोहन संगठ | |||
Revision as of 13:25, 1 April 2026
Template:स्वयंसेवक लेख सम्मोहन (Hypnosis) एक मानसिक अवस्था या प्रक्रिया हे जिसमें व्यक्ति की एकाग्रता बढ़ी हुई, सुझावशीलता बढ़ी हुई रहती हे और परिधीय जागरूकता कम होती हे। इसे अक्सर सम्मोहन चिकित्सा के रूप में चिकित्सीय उद्देश्यों के लिए प्रयोग किया जाता हे, जहाँ एक प्रशिक्षित व्यक्ति (सम्मोहनकर्ता) दूसरे व्यक्ति (विषय) को मौखिक सुझाव और कल्पनाओं के माध्यम से इस अवस्था में ले जाता हे। भारत में, विशेषकर शेखावाटी क्षेत्र में, इसे कभी-कभी "मन की नींद" या "जागृत तंद्रा" के रूप में भी जाना जाता हे।
परिभाषा
सम्मोहन एक ऐसी प्रक्रिया हे जिसमें एक व्यक्ति (सम्मोहनकर्ता) दूसरे व्यक्ति (विषय) को मानसिक रूप से विश्रांत और केंद्रित अवस्था में पहुँचाने के लिए मौखिक सुझाव और दृश्य-कल्पना का उपयोग करता हे। इस अवस्था को सम्मोहन तंद्रा (trance) कहते हैं। यह नींद नहीं हे, बल्कि एक ऐसी अवस्था हे जहाँ व्यक्ति का ध्यान इतना केंद्रित हो जाता हे कि बाहरी विकर्षण महत्वहीन लगने लगते हैं। इस अवस्था में, व्यक्ति की सुझावशीलता (suggestibility) बढ़ जाती हे, जिसका अर्थ हे कि वह चिकित्सीय सुझावों को गहराई से स्वीकार और प्रसंस्करण कर सकता हे। भारतीय संदर्भ में, इसे अक्सर ध्यान की एक गहन अवस्था से जोड़कर देखा जाता हे, हालाँकि दोनों में अंतर हे। सम्मोहन में एक बाहरी मार्गदर्शक होता हे, जबकि ध्यान आम तौर पर आत्म-निर्देशित होता हे।
इतिहास
विश्व में
सम्मोहन के आधुनिक इतिहास की शुरुआत 18वीं सदी में जर्मन चिकित्सक फ्रांज एंटन मेस्मर के सिद्धांतों से हुई, जिन्होंने "पशु चुंबकत्व" (animal magnetism) की अवधारणा दी। बाद में, 19वीं सदी में स्कॉटिश सर्जन जेम्स ब्रेड ने इस प्रक्रिया का नाम "हिप्नोसिस" (ग्रीक नींद देवता हिप्नोस के नाम पर) रखा और इसे एक मनोवैज्ञानिक घटना के रूप में समझाने का प्रयास किया। 20वीं सदी में, मिल्टन एच. एरिक्सन ने चिकित्सीय सम्मोहन को एक नया आयाम दिया, जिसका प्रभाव आज भी दिखता हे।
भारत एवं शेखावाटी क्षेत्र में
भारत में सम्मोहन की अवधारणा नई नहीं हे। प्राचीन ग्रंथों और योगिक परंपराओं में तंत्र-मंत्र, दृष्टि स्थापन (टकटकी) और समाधि जैसी अवस्थाओं का वर्णन मिलता हे, जिनमें सम्मोहन जैसे तत्व देखे जा सकते हैं। शेखावाटी क्षेत्र (झुंझुनू, सीकर, चुरू) की लोककथाओं और मौखिक इतिहास में भी ऐसे किस्से मिलते हैं जहाँ सिद्ध पुरुष या बाबा लोगों को अपनी दृष्टि या वचनों से प्रभावित करते थे। आधुनिक चिकित्सीय सम्मोहन की शुरुआत भारत में 20वीं सदी के मध्य में हुई। राजस्थान में, विशेषकर जयपुर और कोटा जैसे शहरों में, चिकित्सकों ने इसे एक चिकित्सीय उपकरण के रूप में अपनाना शुरू किया। शेखावाटी में, पारंपरिक मान्यताओं के कारण शुरू में इसे संदेह की नज़र से देखा गया, लेकिन धीरे-धीरे शहरी क्षेत्रों में इसकी स्वीकार्यता बढ़ी।
प्रकार
सम्मोहन को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बाँटा जा सकता हे:
पारंपरिक/प्रत्यक्ष सम्मोहन (Traditional/Direct Hypnosis): इसमें सम्मोहनकर्ता सीधे, आदेशात्मक भाषा का प्रयोग करता हे। उदाहरण: "आपकी आँखें भारी हो रही हैं... आप सो रहे हैं।" यह विधि अक्सर मंच प्रदर्शनों में देखी जाती हे।
एरिक्सोनियन/अप्रत्यक्ष सम्मोहन (Ericksonian/Indirect Hypnosis): इसके संस्थापक मिल्टन एरिक्सन थे। इसमें कहानियों, रूपकों और अनुमानित भाषा का उपयोग करके व्यक्ति को सम्मोहन अवस्था में ले जाया जाता हे। यह विधि चिकित्सा में अधिक प्रचलित हे।
इसके अलावा, अन्य प्रकार भी हैं:
- स्व-सम्मोहन (Self-Hypnosis): जहाँ व्यक्ति खुद को सम्मोहन अवस्था में ले जाता हे। यह तनाव प्रबंधन और आत्म-सुधार के लिए लोकप्रिय हे।
- प्रतिगमन सम्मोहन (Regression Hypnosis): इसका उपयोग अतीत की यादों, विशेषकर बचपन या पूर्वजन्म की कथित यादों तक पहुँचने के लिए किया जाता हे। भारत में, पूर्वजन्म सम्मोहन का विषय विशेष रुचि और विवाद दोनों पैदा करता हे।
- सम्मोहन-औषधि (Hypnoanesthesia): दर्द निवारण या बिना दवा के संज्ञाहरण के लिए प्रयोग किया जाता हे, जैसे दंत चिकित्सा या प्रसव में।
वैज्ञानिक अनुसंधान
सम्मोहन एक वैज्ञानिक रूप से मान्यता प्राप्त घटना हे। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) और राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान (NIMHANS) जैसे संस्थानों में इस पर शोध हुआ हे। मस्तिष्क इमेजिंग (fMRI, EEG) अध्ययनों से पता चला हे कि सम्मोहन की अवस्था में मस्तिष्क की गतिविधि में परिवर्तन होते हैं, विशेषकर डिफॉल्ट मोड नेटवर्क और किंकुएट कॉर्टेक्स में। यह दर्शाता हे कि यह केवल कल्पना या सहमति नहीं, बल्कि एक वास्तविक न्यूरोलॉजिकल अवस्था हे।
वैज्ञानिक सहमति हे कि सम्मोहन से दर्द प्रबंधन (क्रोनिक पेन, इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम), चिंता, अवसाद, धूम्रपान छुड़ाना, और वजन नियंत्रण जैसी स्थितियों में मदद मिल सकती हे। हालाँकि, यह एक "जादू की छड़ी" नहीं हे और इसकी सफलता व्यक्ति की सुझावशीलता और सम्मोहनकर्ता की कुशलता पर निर्भर करती हे।
अनुप्रयोग
भारत में सम्मोहन के अनुप्रयोग विविध हैं:
- चिकित्सीय अनुप्रयोग: मनोचिकित्सक, मनोवैज्ञानिक और कुझ� चिकित्सक इसे मानसिक स्वास्थ्य उपचार के एक भाग के रूप में प्रयोग करते हैं। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) और पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER) जैसे संस्थानों में इस पर काम होता हे।
- दंत चिकित्सा: कुछ दंत चिकित्सक दर्द के भय और घबराहट को कम करने के लिए सम्मोहन का उपयोग करते हैं।
- शिक्षा एवं खेल: छात्रों में एकाग्रता बढ़ाने और खिलाड़ियों में प्रदर्शन चिंता कम करने के लिए।
- व्यसन उपचार: शराब और तंबाकू की लत छुड़ाने में सहायक।
- फोरेंसिक सम्मोहन: कानून प्रवर्तन एजेंसियाँ कभी-कभी गवाहों की याददाश्त बढ़ाने के लिए इसका प्रयोग करती हैं, हालाँकि यह विवादास्पद हे और इसकी विश्वसनीयता पर सवाल हे।
भारत में कानूनी स्थिति
भारत में सम्मोहन की कानूनी स्थिति स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं हे। भारतीय चिकित्सा परिषद (MCI) या राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने सम्मोहन चिकित्सा के लिए अलग से कोई विशेष मान्यता या डिग्री जारी नहीं की हे। हालाँकि, पंजीकृत चिकित्सक (एमबीबीएस) और पंजीकृत क्लिनिकल मनोवैज्ञानिक अपने अभ्यास के हिस्से के रूप में सम्मोहन का उपयोग कर सकते हैं।
मंच सम्मोहन (Stage Hypnosis) के लिए कोई राष्ट्रीय कानून नहीं हे, लेकिन कुछ राज्यों में मनोरंजन के लिए इसके प्रदर्शन पर प्रतिबंध या नियम हो सकते हैं। छल या नुकसान पहुँचाने के इरादे से सम्मोहन का उपयोग भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420 (छल) और अन्य प्रावधानों के तहत दंडनीय होगा। पूर्वजन्म सम्मोहन जैसी प्रथाओं को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी जाती हे, क्योंकि इनका दुरुपयोग हो सकता हे।
सांस्कृतिक दृष्टिकोण
शेखावाटी और भारत के अन्य भागों में सम्मोहन के प्रति दृष्टिकोण मिश्रित हे। एक ओर, शहरी, शिक्षित वर्ग इसे एक वैज्ञानिक चिकित्सीय उपकरण के रूप में देखता हे। दूसरी ओर, ग्रामीण और पारंपरिक समुदायों में इसे कभी-कभी जादू-टोना, भ्रम या अंधविश्वास से जोड़कर देखा जाता हे। धार्मिक संदर्भ में, कुछ लोग इसे आध्यात्मिक प्रथाओं (जैसे साधना, ध्यान) के करीब मानते हैं, तो कुछ इसे अप्राकृतिक और संदेहास्पद।
मीडिया (टीवी शो और फिल्मों) में सम्मोहन को अक्सर रहस्यमय और अतिशयोक्तिपूर्ण तरीके से दिखाया जाता हे, जो जनता की धारणा को प्रभावित करता हे। शेखावाटी की मजबूत सामुदायिक और पारिवारिक संरचना के कारण, कोई भी नई चिकित्सा पद्धति अपनाने से पहले परिवार के बुजुर्गों या स्थानीय चिकित्सक की राय ली जाती हे।
भारत के उल्लेखनीय व्यवसायी
- डॉ. बी. एम. हेगड़े: प्रख्यात चिकित्सक और शिक्षाविद् ने चिकित्सा में सम्मोहन के संभावित उपयोगों पर लिखा हे।
- डॉ. जे. आर. कीठ: मुंबई के एक प्रसिद्ध मनोचिकित्सक जिन्होंने भारत में चिकित्सीय सम्मोहन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- डॉ. नरेश कुमार मित्तल: दिल्ली के एक मनोचिकित्सक जो सम्मोहन-औषधि (हिप्नोएनेस्थीसिया) में विशेषज्ञ हैं।
- डॉ. (श्रीमती) सुनीता महेश्वरी: जयपुर की एक मनोचिकित्सक जिन्होंने राजस्थान में चिकित्सीय सम्मोहन के प्रति जागरूकता फैलाने का काम किया हे।
- भारतीय सम्मोहन एवं सम्मोहन चिकित्सा संस्थान (IAHT), कोलकाता: एक प्रमुख संस्थान जो सम्मोहन में प्रशिक्षण और प्रमाणन प्रदान करता हे।
- राष्ट्रीय सम्मोहन संगठ