रिग्रेशन हिप्नोसिस: Difference between revisions

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<big>'''रीग्रेशन हिप्नोसिस (पिछला जनम रिग्रेशन)'''</big>
'''रीग्रेशन हिप्नोसिस''' (पास्ट लाइफ रीग्रेशन) एगो विशेष प्रकार क हिप्नोसिस थेरेपी हे, जेमें व्यक्ति अवचेतन मन क गहराईमें ले जाया जाय छे ताकि ओ पिछला जीवन क याद (पूर्व जन्म क अनुभव) वा बचपन क भूलल घटना याद करी सके। ई [[हिप्नोसिस]] क एगो शाखा हे। थेरेपी मानल जाय छे कि वर्तमान क मनोवैज्ञानिक समस्या, भय, वा शारीरिक रोग क कारण पिछला अनुभवमें छे। भारतमें, जहां पुनर्जन्म मान्यता प्राचीन समयसें छे, ई विधि क विशेष रूपसें रुचि देखल जाय छे।
 
'''रीग्रेशन हिप्नोसिस''' एगो हिप्नोथेरेपी के तरीका हवे जेहमे कौनों व्यक्ति के अवचेतन मन के गहिराई में ले जाएल जाला आ ओकरा के पिछला याद (आयु रिग्रेशन) या फिर पिछला जनम के अनुभव (पास्ट लाइफ रिग्रेशन) में ले जाएल जाला। प्रक्रिया मुख्य रूप से मानसिक या भावनात्मक समस्या के मूल कारण पता लगावे खातिर, या फिर आध्यात्मिक जिज्ञासा के संतुष्टि खातिर इस्तेमाल कइल जाला। भारत में, जहाँ पुनर्जन्म के मान्यता प्राचीन काल से रहल बा, ई तकनीक के दर्शन आ चिकित्सा दुनों नजरिया से बेहतर रूप से देखल जाला।


== परिभाषा ==
== परिभाषा ==
रीग्रेशन हिप्नोसिस एगो निर्देशित प्रक्रिया हे, जेमें प्रशिक्षित चिकित्सक (हिप्नोथेरेपिस्ट) व्यक्ति क गहरी विश्राम क अवस्थामें ले जाय छे, जेकरा '''हिप्नोटिक ट्रान्स''' कहल जाय छे। ई अवस्थामें व्यक्ति क चेतना ओकर अवचेतन मनसें जुड़ल रहे छे। थेरेपिस्ट फेर विशेष सुझाव देकर ओकरा समय क पीछे ले जाय छे – या तो ई जन्म क बचपनमें या फेर पिछला जन्ममें। ई मानल जाय छे कि ई प्रक्रियासें '''दबल दुखद घटना''' सामने आ सके छे आ वर्तमान क परेशानी क मूल कारण समझमें आ सके छे।
रीग्रेशन हिप्नोसिस एगो '''[[हिप्नोसिस|हिप्नोटिक]]''' स्थिति हवे जेहमे व्यक्ति के ओकरा सामान्य चेतना के अवस्था से अलग, एगो बदलल चेतना (अल्टर्ड स्टेट ऑफ कॉन्शियसनेस) में ले जाएल जाला। ई अवस्था में, मन के तर्क करे वाला हिस्सा (क्रिटिकल फैकल्टी) शांत हो जाला आ अवचेतन मन के सामग्री सामने आ सके ला। '''रिग्रेशन''' के मतलब होला "पीछे ले जाएल"। एकरा दू गो मुख्य प्रकार बा: '''एज रिग्रेशन''' (ब्यक्ति के ओकरा बचपन या जवानी के समय में ले जाएल) आ '''पास्ट लाइफ रिग्रेशन''' (पिछला जनम के अनुभव में ले जाएल)। कबो-कबार '''लाइफ बिटवीन लाइफ्स''' (LBL) रिग्रेशन भी कइल जाला, जेहमे दू जनम के बीच के अवस्था के अनुभव कइल जाला।


== इतिहास ==
== इतिहास ==
आधुनिक रीग्रेशन हिप्नोसिस क इतिहास क कुछ महत्वपूर्ण नाम कामसें जुड़ल हे।
आधुनिक रीग्रेशन थेरेपी के जड़ पश्चिमी देशन में बा, हालाँकि, भारत में तप, ध्यान समाधि के परंपरा में मन के अलग-अलग अवस्था में प्रवेश करे के बिधि सदियों से मौजूद रहल बा।


'''मोरे बर्नस्टाइन''' (Morey Bernstein): सन् १९५६में ओकर किताब ''"द सर्च फॉर ब्राइडी मर्फी"'' (The Search for Bridey Murphy) कारण पश्चिमी दुनियामें पास्ट लाइफ रीग्रेशन क बहुत चर्चा भई। ई किताबमें एगो महिला क हिप्नोसिससें पिछला जन्म आयरलैंडमें बतावल गेल हे।
* '''मोरे बर्नस्टाइन''': 1950 के दशक में, अमेरिकी व्यवसायी '''मोरे बर्नस्टाइन''' नं "द सर्च फॉर ब्राइडी मर्फी" नाँव के किताब लिखलें, जेहमे ऊ एक महिला के हिप्नोसिस के तहत पिछला जनम के बिबरण दिहलें। ई किताब पश्चिमी दुनिया में पास्ट लाइफ रिग्रेशन के लोकप्रियता के शुरुआत मानल जाला।


'''ब्रायन वीस''' (Brian Weiss): एगो अमेरिकी मनोचिकित्सक, जे पारंपरिक उपचारसें ना सुधरल मरीज क पास्ट लाइफ रीग्रेशनसें सफलतासें इलाज करी क बाद प्रसिद्ध भई। ओकर किताब ''"मेनी लाइव्स, मेनी मास्टर्स"'' (Many Lives, Many Masters) बहुत प्रसिद्ध भई आ भारत समेत दुनियाभरमें ओकरा पढ़ल जाय छे।
* '''ब्रायन वीस''': 1980 के दशक में, अमेरिकी मनोचिकित्सक '''ब्रायन वीस''' नं अपना रोगी "कैथरीन" के साथ रीग्रेशन थेरेपी के अनुभव के बारे में "मेनी लाइव्स, मेनी मास्टर्स" किताब लिखलें। ऊ पारंपरिक मनोचिकित्सा से आए रहलें आ ओकरा अनुभव ओकरा दृष्टिकोण बदल दिहलस। ओकरा किताब भारत सहित दुनिया भर में बहुत प्रसिद्ध भइल।


'''माइकल न्यूटन''' (Michael Newton): ओकर काम '''लाइफ बिटवीन लाइव्स''' (LBL) यानी जन्मों क बीच क जीवन पर केंद्रित छे। ओ बतावे छे कि हिप्नोसिस क दौरान लोग आत्मा क दुनिया, ओकर गाइड, आ जन्म लेवे क फैसला क बारेमें बतावे छे।
* '''माइकल न्यूटन''': ओकरा शोध '''लाइफ बिटवीन लाइफ्स''' (LBL) पर केंद्रित रहल। ओकरा किताब "जर्नी ऑफ सोल्स" में ऊ दावा कइलें कि हिप्नोसिस के जरिये लोग दू जनम के बीच के आध्यात्मिक दुनिया के अनुभव कर सके ला।


'''डोलोरेस कैनन''' (Dolores Cannon): ओकर तकनीक '''क्वांटम हीलिंग हिप्नोसिस''' कहल जाय छे। ओ बहुत गहरी ट्रान्स अवस्थामें लोगसें बात करी आ ओकरा "अवचेतन" या "उच्च आत्मा"सें जुड़ल जानकारी प्राप्त करे क बारेमें लिखल हे। ओकर किताब भारतमें भी बहुत लोकप्रिय हे।
* '''डोलोरेस कैनन''': ओकरा तकनीक, '''क्वांटम हीलिंग हिप्नोसिस तकनीक''' (QHHT), बहुत प्रभावशाली रहल। ऊ कई गो "उच्चस्तरीय आत्मा" से संपर्क के बिबरण दिहलें आ ओकरा काम में मानव इतिहास आ भविष्य के बारे में बड़हन दावा सामिल रहल।


== कार्यप्रणाली ==
== कार्यप्रणाली ==
रीग्रेशन हिप्नोसिस क सत्र आमतौर पर कुछ चरणमें होय छे:
रीग्रेशन थेरेपी के सत्र आमतौर पर एगो शांत आ आरामदायक कमरा में होला। थेरेपिस्ट पहिले व्यक्ति के विस्तार से जानकारी लेला फिर ओकरा के आराम से बैठा या लेटा देला। फेर '''प्रगतिशील विश्राम''' (प्रोग्रेसिव रिलैक्सेशन) आ '''नेत्र थकान''' जइसन तकनीक से हिप्नोटिक अवस्था में ले जाएल जाला। एक बार व्यक्ति हिप्नोसिस में प्रवेश करि जाय तब, थेरेपिस्ट ओकरा के समय में पीछे ले जाए खातिर मार्गदर्शन करे ला। ओकरा के कौनों विशेष घटना, भावना या शारीरिक संवेदना पर ध्यान केंद्रित करे के कहल जा सकता हवे। व्यक्ति अक्सर बिबरण देवे ला, कबो-कबार अलग आवाज या भाषा में भी। सत्र के अंत में, थेरेपिस्ट व्यक्ति के सामान्य अवस्था में वापस ले आवे ला फिर ओकरा अनुभव के बारे में बातचीत (डिब्रीफिंग) करे ला।
# '''पूर्व चर्चा''': थेरेपिस्ट मरीजसें ओकर समस्या उम्मीद क बारेमें बात करे छे।
# '''आरम्भ''' आ '''गहरी विश्राम''': व्यक्ति क आरामदायक स्थितिमें बैठाया या लेटाया जाय छे। फेर शांत आरामदायक आवाजमें थेरेपिस्ट ओकरा धीरे-धीरे ट्रान्समें ले जाय छे।
# '''रीग्रेशन''': थेरेपिस्ट समय पीछे जाय क निर्देश दे छे, जेमें विशेष उम्र या घटना क ओर ले जाया जा सके।
# '''अनुभव क जांच''' आ '''उपचार''': व्यक्ति जो देखे छे या महसूस करे छे, ओकर बारेमें बतावे छे। थेरेपिस्ट ओ घटना क भावनात्मक चार्ज कम करे में मदद करे छे आ नया, सकारात्मक सुझाव दे छे।
# '''सत्र क समापन''': व्यक्ति क वर्तमानमें वापस लाया जाय छे ट्रान्ससें बाहर निकाल जाय छे।


== प्रकार ==
== प्रकार ==
रीग्रेशन हिप्नोसिस क मुख्य रूप तीन प्रकार हे:
'''एज रिग्रेशन''': ई तकनीक में व्यक्ति के ओकरा वर्तमान जनम के पिछला समय में ले जाएल जाला, जइसे कि बचपन। ई अक्सर ओह समय के दबल याद के सामने ले आवे खातिर इस्तेमाल होला जे वर्तमान समस्या के कारण बनल बा।
 
'''आयु रीग्रेशन (एज रीग्रेशन)''': ईमें व्यक्ति क ईही जन्म क पिछले समयमें, खासकर बचपनमें ले जाया जाय छे। ई अक्सर भूलल '''ट्रॉमा''' या दुखद घटना क पता लगावे आ ओकरा ठीक करे खातिर इस्तेमाल होय छे।


'''पास्ट लाइफ रीग्रेशन (पूर्व जन्म रीग्रेशन)''': ई सबसें प्रसिद्ध प्रकार हे। ईमें व्यक्ति मानल जाय छे कि ओकर पिछला जन्ममें ले जाया जा रहय छे। लोग अक्सर दूसरा समय, स्थान, आ पहचान क अनुभव करे छे। ई वर्तमान फोबिया, रिश्ता क समस्या, या असमझदार भय क कारण समझे में मदद करी सके छे।
'''पास्ट लाइफ रिग्रेशन (PLR)''': ई सबसे चर्चित प्रकार हवे। इहाँ व्यक्ति के ओकरा मानल जाए वाला पिछला जनम में ले जाएल जाला। कई लोग ई दावा करे ला कि ओकरा अनुभव से ओकरा वर्तमान फोबिया, रिश्ता में दिक्कत, या शारीरिक बेमारी के कारण समझ में आ गइल।


'''लाइफ बिटवीन लाइव्स (एलबीएल) रीग्रेशन''': ई माइकल न्यूटन क विकसित कील विधि हे। ईमें व्यक्ति क पिछला जन्म ना देखाकर, दो जन्मों क बीच क आत्मिक अवस्थामें ले जाया जाय छे। ईमें "आत्मा क समूह", "ज्ञान क संरक्षक", जीवन क उद्देश्य क बारेमें अनुभव हो सके छे।
'''लाइफ बिटवीन लाइफ्स रिग्रेशन (LBL)''': ई गहिरा प्रकार हवे, जेहमे व्यक्ति के मृत्यु आ अगिला जनम के बीच के अवस्था में ले जाएल जाला। इहाँ "आत्मा के दुनिया", "मार्गदर्शक", या "जीवन के समीक्षा" जइसन अनुभव हो सके ला। ई ज्यादातर आध्यात्मिक खोज खातिर इस्तेमाल होला।


== वैज्ञानिक दृष्टिकोण ==
== वैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य ==
वैज्ञानिक समुदाय रीग्रेशन हिप्नोसिस, खासकर पास्ट लाइफ रीग्रेशन क प्रति सन्देह क नजरसें देखे छे। कई वैज्ञानिक ई माने छे कि हिप्नोसिस क अवस्थामें दिखल "पिछला जन्म" क याद वास्तव में '''कल्पना''', फिल्म, किताब, वा बचपन क कहानीसें प्रभावित छे। मनोविज्ञानमें '''क्रिप्टोमनेसिया''' (भूलल स्रोतसें याद आना) आ '''कन्फैब्युलेशन''' (अचेतन मन क कहानी बनावे) जैसा घटना कारण हो सके छे।
पारंपरिक विज्ञान आ मनोविज्ञान रीग्रेशन हिप्नोसिस, खासकर पिछला जनम रिग्रेशन, के प्रति संदेह के नजरिया रखे ला। कई वैज्ञानिक ई माने ला कि हिप्नोसिस के अवस्था में मन '''कन्फैब्युलेट''' (गढ़ल कहानी बनावे) कर सके ला, जेहमे अवचेतन मन के डर, इच्छा, किताब में पढ़ल बात, फिलिम में देखल दृश्य, या सांस्कृतिक कथा सामग्री के मिलावट हो जाला। ई '''झूठी याद''' (फॉल्स मेमोरी) के रूप में सामने आ सके ला। हालाँकि, हिप्नोसिस के तनाव कम करे, विश्राम देए आ कौनों दबल भावना के सामने ले आवे में चिकित्सीय फायदा मानल जाला, बशर्ते ई प्रशिक्षित चिकित्सक द्वारा कइल जाय।


हालांकि, कुछ शोधकर्ता ई माने छे कि हिप्नोसिस गहरी याद क पुनर्प्राप्त करे क एगो शक्तिशाली तरीका हे, भले ओ याद वास्तविक हो या प्रतीकात्मक। वर्तमान क समस्या पर ओकर सकारात्मक प्रभाव कारण ई एगो '''मनोचिकित्सा उपकरण''' क रूपमें स्वीकार कियल जाय सके छे।
== पुनर्जन्म शोध ==
पिछला जनम के दावा के जांच करे वाला शोधकर्ता, जइसे कि '''डॉ. इयान स्टीवेन्सन''' (वर्जीनिया विश्वविद्यालय), भारत सहित कई देशन में बच्चा के केस के अध्ययन कइलेन जे अपना पिछला जनम के बारे में विस्तार से बतावत रहल। ओकरा शोध में '''जन्मचिह्न''' (बर्थमार्क) आ जन्मदोष के पिछला जनम में घाव से जोड़े के कोशिश कइल गइल। भारत में, ई तरह के केस समाचार पत्र आ लोककथा में अक्सर सामने आवे ला। हालाँकि, वैज्ञानिक समुदाय ई केस के सबूत के रूप में आमतौर पर स्वीकार नइखे करे ला, आ ई के लेखाप्रवाह (डॉक्युमेंटेशन) आ सत्यापन में कठिनाई के बतावे ला।


== पुनर्जन्म शोध आ भारतीय संदर्भ ==
== भारत में अभ्यास ==
भारतमें पुनर्जन्म क अवधारणा हजारों सालसें धर्म आ दर्शन क हिस्सा रहय छे। हिन्दू, बौद्ध, जैन, आ सिख धर्ममें केंद्रीय विश्वास हे। ई कारण, पास्ट लाइफ रीग्रेशन क विचार भारतीय लोग खातिर अजनबी नाई हे।
भारत में रीग्रेशन हिप्नोसिस के अभ्यास एगो मिश्रित रूप लेल बा। एक ओर, पुनर्जन्म में गहिरा आस्था होखे के कारण ई तकनीक के लिए उपजाऊ जमीन बा। दूसरी ओर, ई पश्चिमी मनोविज्ञान से आइल एगो "नया" तरीका हवे।


भारतमें डॉ. '''इयान स्टीवेन्सन''' (Ian Stevenson) क काम क बहुत महत्व देल जाय छे। ओ अमेरिकी मनोचिकित्सक छे, जेने बच्चा क स्वतःस्फूर्त पिछला जन्म क याद पर दशकों तक शोध करी, खासकर भारत एशिया क देशमें। ओकर किताब ''"ट्वेंटी केसेस सजेस्टिव ऑफ रीइनकार्नेशन"'' मशहूर हे। भारत क डॉ. '''सत्यवंत सावंत''' जैसा शोधकर्ता ने पुनर्जन्म क केस क अध्ययन करेमें योगदान दियल हे।
* '''स्थानीय चिकित्सक''': भारत में कई प्रशिक्षित हिप्नोथेरेपिस्ट बा जे रीग्रेशन तकनीक इस्तेमाल करे ला, जइसे कि '''डॉ. नलिनी तिवारी''' (मुंबई), '''डॉ. वी.के. शर्मा''' अन्य। कई लोग '''ब्रायन वीस''' या '''डोलोरेस कैनन''' के तरीका सीख के ओकरा प्रैक्टिस करे ला। ई चिकित्सक अक्सर बड़हन शहरन में मिल जाईहें।


== भारतमें अभ्यास ==
* '''सांस्कृतिक दृष्टिकोण''': भारतीय दर्शन, खासकर '''हिंदू''' आ '''बौद्ध''' परंपरा, में पुनर्जन्म आ कर्म के सिद्धांत केंद्रीय बा। ई कारण, पिछला जनम के बारे में बात करे में भारत में ओतना विरोध नइखे होखे जतना पश्चिमी देशन में हो सके ला। लोग अक्सर देखे में रुचि रखे ला कि ओकरा वर्तमान जीवन के समस्या के संबंध पिछला जनम से बा की ना।
भारतमें रीग्रेशन हिप्नोसिस क अभ्यास बढ़त जा रहय हे। दिल्ली, मुंबई, बैंगलोर, चेन्नई जैसा महानगरमें कई प्रशिक्षित हिप्नोथेरेपिस्ट कार्य करत हे। कुछ भारतीय चिकित्सक आ मनोवैज्ञानिक तकनीक आपन परंपरागत उपचारसें जोड़ रहय हे।


भारतीय संस्कृति क कारण, यहां क लोग पिछला जन्म क अनुभव क संभावना क प्रति अधिक खुले हे। कई लोग ई थेरेपी '''कर्म''' क समझ, पारिवारिक समस्या क कारण, या जीवन क उद्देश्य जाने खातिर इस्तेमाल करत हे। भारतमें कुछ प्रसिद्ध प्रैक्टिशनर या केंद्रमें शामिल हे:
* '''मीडिया आ जनचेतना''': हिंदी क्षेत्रीय भाषा के टीवी चैनल, अखबार आ अब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कभी-कभार रीग्रेशन थेरेपी के कहानी देखल जा सके ला। कई लोग एकरा के '''वैकल्पिक चिकित्सा''' के रूप में देखे ला। हालाँकि, एकरा के लेके अंधविश्वास वैज्ञानिक चिकित्सा के बीच के बहस भी जारी बा।
* डॉ. '''निलम खत्री''' ओकर संस्था, जे हिप्नोथेरेपी पर काम करे छे।
* '''द हिप्नोसिस क्लिनिक''' (मुंबई, दिल्ली) जैसा केंद्र।
* कई आध्यात्मिक गुरु योग शिक्षक ने हिप्नोसिस क तकनीक आपन कार्यमें शामिल करल हे।


== कानूनी आ नैतिक विचार ==
== कानूनी आ नैतिक विचार ==
भारतमें हिप्नोसिस क अभ्यास क लेकर कोई स्पष्ट राष्ट्रीय कानून नाई हे। हालांकि, '''इंडियन मेडिकल एसोसिएशन''' (IMA) आ '''राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग''' (NMC) क दिशानिर्देश लागू हो सके छे। केवल प्रशिक्षित आ योग्य चिकित्सक या मनोवैज्ञानिक ही थेरेपी क रूपमें हिप्नोसिस इस्तेमाल कर सके छे।
भारत में, हिप्नोसिस के प्रैक्टिस के लेके स्पष्ट कानून नइखे बा, बलुक ई '''चार्टर्ड अकाउंटेंट''' या '''डॉक्टर''' के तरह रेगुलेट नइखे होखे। ई कारण, '''नैतिक जिम्मेवारी''' चिकित्सक पर बहुत ज्यादा बा।


नैतिक चिंता में शामिल हे:
* '''प्रशिक्षण आ योग्यता''': ग्राहक के ई देखे के जरूरत बा कि थेरेपिस्ट के उचित प्रशिक्षण बा की ना। बिना प्रशिक्षण के व्यक्ति द्वारा कइल गइल रीग्रेशन मानसिक नुकसान पहुँचा सके ला।
* '''सुझाव क शक्ति''': थेरेपिस्ट क सुझावसें गलत या नकली याद बन सके छे।
* '''भावनात्मक उथल-पुथल''': दबल ट्रॉमा सामने आवे पर व्यक्ति परेशान हो सके छे।
* '''व्यावसायिक सीमा''': थेरेपिस्ट क ओकर विश्वास आ भरोसा क दुरुपयोग ना करे।
* '''अंधविश्वास''': लोग वैज्ञानिक इलाज छोड़ी केवल ई थेरपी पर निर्भर हो जाय।


अच्छा अभ्यास ई हे कि रीग्रेशन हिप्नोसिस पारंपरिक चिकित्सा क पूरक क रूपमें इस्तेमाल हो, विकल्प क रूपमें नाई।
* '''सहमति''': थेरेपी शुरू करे से पहिले, प्रक्रिया के जोखिम आ लाभ के बारे में स्पष्ट रूप से बताए के आ '''लिखित सहमति''' ले के जरूरत बा।


== यह भी देखो ==
* '''कमजोर मानसिक स्थिति''': जे लोग गंभीर मानसिक रोग जइसे कि सिजोफ्रेनिया या गहिरा डिप्रेशन से पीड़ित बा, ओकरा खातिर रीग्रेशन थेरेपी उपयुक्त नइखे हो सके ला।
* [[हिप्नोसिस]]
* [[पुनर्जन्म]]
* [[मनोचिकित्सा]]
* [[अवचेतन मन]]
* [[कर्म]]
* [[ध्यान]]


== संदर्भ ==
* '''वित्तीय शोषण''': कबो-कबार अयोग्य व्यक्ति लोग के आशा दे के ज्यादा पैसा वसूल करे ला। सावधानी के जरूरत बा।
{{Reflist}}


[[Category:Hypnosis]]
* '''सांस्कृतिक संवेदनशीलता''': भारत जइसन बहुलवादी समाज में, थेरेपिस्ट के ग्राह
[[Category:Reincarnation]]
[[Category:Past life regression]]
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Revision as of 13:40, 1 April 2026

रीग्रेशन हिप्नोसिस (पिछला जनम रिग्रेशन)

रीग्रेशन हिप्नोसिस एगो हिप्नोथेरेपी के तरीका हवे जेहमे कौनों व्यक्ति के अवचेतन मन के गहिराई में ले जाएल जाला आ ओकरा के पिछला याद (आयु रिग्रेशन) या फिर पिछला जनम के अनुभव (पास्ट लाइफ रिग्रेशन) में ले जाएल जाला। ई प्रक्रिया मुख्य रूप से मानसिक या भावनात्मक समस्या के मूल कारण पता लगावे खातिर, या फिर आध्यात्मिक जिज्ञासा के संतुष्टि खातिर इस्तेमाल कइल जाला। भारत में, जहाँ पुनर्जन्म के मान्यता प्राचीन काल से रहल बा, ई तकनीक के दर्शन आ चिकित्सा दुनों नजरिया से बेहतर रूप से देखल जाला।

परिभाषा

रीग्रेशन हिप्नोसिस एगो हिप्नोटिक स्थिति हवे जेहमे व्यक्ति के ओकरा सामान्य चेतना के अवस्था से अलग, एगो बदलल चेतना (अल्टर्ड स्टेट ऑफ कॉन्शियसनेस) में ले जाएल जाला। ई अवस्था में, मन के तर्क करे वाला हिस्सा (क्रिटिकल फैकल्टी) शांत हो जाला आ अवचेतन मन के सामग्री सामने आ सके ला। रिग्रेशन के मतलब होला "पीछे ले जाएल"। एकरा दू गो मुख्य प्रकार बा: एज रिग्रेशन (ब्यक्ति के ओकरा बचपन या जवानी के समय में ले जाएल) आ पास्ट लाइफ रिग्रेशन (पिछला जनम के अनुभव में ले जाएल)। कबो-कबार लाइफ बिटवीन लाइफ्स (LBL) रिग्रेशन भी कइल जाला, जेहमे दू जनम के बीच के अवस्था के अनुभव कइल जाला।

इतिहास

आधुनिक रीग्रेशन थेरेपी के जड़ पश्चिमी देशन में बा, हालाँकि, भारत में तप, ध्यान आ समाधि के परंपरा में मन के अलग-अलग अवस्था में प्रवेश करे के बिधि सदियों से मौजूद रहल बा।

  • मोरे बर्नस्टाइन: 1950 के दशक में, अमेरिकी व्यवसायी मोरे बर्नस्टाइन नं "द सर्च फॉर ब्राइडी मर्फी" नाँव के किताब लिखलें, जेहमे ऊ एक महिला के हिप्नोसिस के तहत पिछला जनम के बिबरण दिहलें। ई किताब पश्चिमी दुनिया में पास्ट लाइफ रिग्रेशन के लोकप्रियता के शुरुआत मानल जाला।
  • ब्रायन वीस: 1980 के दशक में, अमेरिकी मनोचिकित्सक ब्रायन वीस नं अपना रोगी "कैथरीन" के साथ रीग्रेशन थेरेपी के अनुभव के बारे में "मेनी लाइव्स, मेनी मास्टर्स" किताब लिखलें। ऊ पारंपरिक मनोचिकित्सा से आए रहलें आ ओकरा अनुभव ओकरा दृष्टिकोण बदल दिहलस। ओकरा किताब भारत सहित दुनिया भर में बहुत प्रसिद्ध भइल।
  • माइकल न्यूटन: ओकरा शोध लाइफ बिटवीन लाइफ्स (LBL) पर केंद्रित रहल। ओकरा किताब "जर्नी ऑफ सोल्स" में ऊ दावा कइलें कि हिप्नोसिस के जरिये लोग दू जनम के बीच के आध्यात्मिक दुनिया के अनुभव कर सके ला।
  • डोलोरेस कैनन: ओकरा तकनीक, क्वांटम हीलिंग हिप्नोसिस तकनीक (QHHT), बहुत प्रभावशाली रहल। ऊ कई गो "उच्चस्तरीय आत्मा" से संपर्क के बिबरण दिहलें आ ओकरा काम में मानव इतिहास आ भविष्य के बारे में बड़हन दावा सामिल रहल।

कार्यप्रणाली

रीग्रेशन थेरेपी के सत्र आमतौर पर एगो शांत आ आरामदायक कमरा में होला। थेरेपिस्ट पहिले व्यक्ति के विस्तार से जानकारी लेला आ फिर ओकरा के आराम से बैठा या लेटा देला। फेर प्रगतिशील विश्राम (प्रोग्रेसिव रिलैक्सेशन) आ नेत्र थकान जइसन तकनीक से हिप्नोटिक अवस्था में ले जाएल जाला। एक बार व्यक्ति हिप्नोसिस में प्रवेश करि जाय तब, थेरेपिस्ट ओकरा के समय में पीछे ले जाए खातिर मार्गदर्शन करे ला। ओकरा के कौनों विशेष घटना, भावना या शारीरिक संवेदना पर ध्यान केंद्रित करे के कहल जा सकता हवे। व्यक्ति अक्सर बिबरण देवे ला, कबो-कबार अलग आवाज या भाषा में भी। सत्र के अंत में, थेरेपिस्ट व्यक्ति के सामान्य अवस्था में वापस ले आवे ला आ फिर ओकरा अनुभव के बारे में बातचीत (डिब्रीफिंग) करे ला।

प्रकार

एज रिग्रेशन: ई तकनीक में व्यक्ति के ओकरा वर्तमान जनम के पिछला समय में ले जाएल जाला, जइसे कि बचपन। ई अक्सर ओह समय के दबल याद के सामने ले आवे खातिर इस्तेमाल होला जे वर्तमान समस्या के कारण बनल बा।

पास्ट लाइफ रिग्रेशन (PLR): ई सबसे चर्चित प्रकार हवे। इहाँ व्यक्ति के ओकरा मानल जाए वाला पिछला जनम में ले जाएल जाला। कई लोग ई दावा करे ला कि ओकरा अनुभव से ओकरा वर्तमान फोबिया, रिश्ता में दिक्कत, या शारीरिक बेमारी के कारण समझ में आ गइल।

लाइफ बिटवीन लाइफ्स रिग्रेशन (LBL): ई गहिरा प्रकार हवे, जेहमे व्यक्ति के मृत्यु आ अगिला जनम के बीच के अवस्था में ले जाएल जाला। इहाँ "आत्मा के दुनिया", "मार्गदर्शक", या "जीवन के समीक्षा" जइसन अनुभव हो सके ला। ई ज्यादातर आध्यात्मिक खोज खातिर इस्तेमाल होला।

वैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य

पारंपरिक विज्ञान आ मनोविज्ञान रीग्रेशन हिप्नोसिस, खासकर पिछला जनम रिग्रेशन, के प्रति संदेह के नजरिया रखे ला। कई वैज्ञानिक ई माने ला कि हिप्नोसिस के अवस्था में मन कन्फैब्युलेट (गढ़ल कहानी बनावे) कर सके ला, जेहमे अवचेतन मन के डर, इच्छा, किताब में पढ़ल बात, फिलिम में देखल दृश्य, या सांस्कृतिक कथा सामग्री के मिलावट हो जाला। ई झूठी याद (फॉल्स मेमोरी) के रूप में सामने आ सके ला। हालाँकि, हिप्नोसिस के तनाव कम करे, विश्राम देए आ कौनों दबल भावना के सामने ले आवे में चिकित्सीय फायदा मानल जाला, बशर्ते ई प्रशिक्षित चिकित्सक द्वारा कइल जाय।

पुनर्जन्म शोध

पिछला जनम के दावा के जांच करे वाला शोधकर्ता, जइसे कि डॉ. इयान स्टीवेन्सन (वर्जीनिया विश्वविद्यालय), भारत सहित कई देशन में बच्चा के केस के अध्ययन कइलेन जे अपना पिछला जनम के बारे में विस्तार से बतावत रहल। ओकरा शोध में जन्मचिह्न (बर्थमार्क) आ जन्मदोष के पिछला जनम में घाव से जोड़े के कोशिश कइल गइल। भारत में, ई तरह के केस समाचार पत्र आ लोककथा में अक्सर सामने आवे ला। हालाँकि, वैज्ञानिक समुदाय ई केस के सबूत के रूप में आमतौर पर स्वीकार नइखे करे ला, आ ई के लेखाप्रवाह (डॉक्युमेंटेशन) आ सत्यापन में कठिनाई के बतावे ला।

भारत में अभ्यास

भारत में रीग्रेशन हिप्नोसिस के अभ्यास एगो मिश्रित रूप लेल बा। एक ओर, पुनर्जन्म में गहिरा आस्था होखे के कारण ई तकनीक के लिए उपजाऊ जमीन बा। दूसरी ओर, ई पश्चिमी मनोविज्ञान से आइल एगो "नया" तरीका हवे।

  • स्थानीय चिकित्सक: भारत में कई प्रशिक्षित हिप्नोथेरेपिस्ट बा जे रीग्रेशन तकनीक इस्तेमाल करे ला, जइसे कि डॉ. नलिनी तिवारी (मुंबई), डॉ. वी.के. शर्मा आ अन्य। कई लोग ब्रायन वीस या डोलोरेस कैनन के तरीका सीख के ओकरा प्रैक्टिस करे ला। ई चिकित्सक अक्सर बड़हन शहरन में मिल जाईहें।
  • सांस्कृतिक दृष्टिकोण: भारतीय दर्शन, खासकर हिंदूबौद्ध परंपरा, में पुनर्जन्म आ कर्म के सिद्धांत केंद्रीय बा। ई कारण, पिछला जनम के बारे में बात करे में भारत में ओतना विरोध नइखे होखे जतना पश्चिमी देशन में हो सके ला। लोग अक्सर ई देखे में रुचि रखे ला कि ओकरा वर्तमान जीवन के समस्या के संबंध पिछला जनम से बा की ना।
  • मीडिया आ जनचेतना: हिंदी आ क्षेत्रीय भाषा के टीवी चैनल, अखबार आ अब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कभी-कभार रीग्रेशन थेरेपी के कहानी देखल जा सके ला। कई लोग एकरा के वैकल्पिक चिकित्सा के रूप में देखे ला। हालाँकि, एकरा के लेके अंधविश्वास आ वैज्ञानिक चिकित्सा के बीच के बहस भी जारी बा।

कानूनी आ नैतिक विचार

भारत में, हिप्नोसिस के प्रैक्टिस के लेके स्पष्ट कानून नइखे बा, बलुक ई चार्टर्ड अकाउंटेंट या डॉक्टर के तरह रेगुलेट नइखे होखे। ई कारण, नैतिक जिम्मेवारी चिकित्सक पर बहुत ज्यादा बा।

  • प्रशिक्षण आ योग्यता: ग्राहक के ई देखे के जरूरत बा कि थेरेपिस्ट के उचित प्रशिक्षण बा की ना। बिना प्रशिक्षण के व्यक्ति द्वारा कइल गइल रीग्रेशन मानसिक नुकसान पहुँचा सके ला।
  • सहमति: थेरेपी शुरू करे से पहिले, प्रक्रिया के जोखिम आ लाभ के बारे में स्पष्ट रूप से बताए के आ लिखित सहमति ले के जरूरत बा।
  • कमजोर मानसिक स्थिति: जे लोग गंभीर मानसिक रोग जइसे कि सिजोफ्रेनिया या गहिरा डिप्रेशन से पीड़ित बा, ओकरा खातिर रीग्रेशन थेरेपी उपयुक्त नइखे हो सके ला।
  • वित्तीय शोषण: कबो-कबार अयोग्य व्यक्ति लोग के आशा दे के ज्यादा पैसा वसूल करे ला। सावधानी के जरूरत बा।
  • सांस्कृतिक संवेदनशीलता: भारत जइसन बहुलवादी समाज में, थेरेपिस्ट के ग्राह