रीग्रेशन हिप्नोसिस: Difference between revisions

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<big>'''रीग्रेशन हिप्नोसिस (पास्ट लाइफ रिग्रेशन)'''</big>
<big>'''रिग्रेशन हिप्नोसिस (पास्ट लाइफ रिग्रेशन)'''</big>


'''रीग्रेशन हिप्नोसिस''' (जेकै पास्ट लाइफ रिग्रेशन या पूर्व जन्म रिग्रेशन भी कहै सै) एगो [[हिप्नोसिस]] कै विशेष तकनीक सै जेकैं मनुष्य कै मन कै गहराई मां जाकै पिछला समय कै यादां या अनुभवां तक पहुंचै कै लेई इस्तेमाल करै सै। इसमां व्यक्ति कै '''ट्रान्स''' कै अवस्था मां ले जाया जाथा, जेकरा बाद वो अपणे बचपन, जन्म कै समय, या फेर कई लोगां कै दावै अनुसार अपणे '''पूर्व जन्मां''' कै बारै मां बात करै सै। इ एगो विवादास्पद विधि सै जेकै कुछ लोग चिकित्सा कै रूप मां मानै सै तो कुछ लोग इकै वैज्ञानिक दृष्टि सै नी मानै सै।
'''रिग्रेशन हिप्नोसिस''' ek aisa तरीका hai jisme [[हिप्नोसिस]] ke माध्यम से kisi व्यक्ति ke दिमाग me se पुरानी यादों aur अनुभवों ko वापस लाया जाता hai. Iske दो मुख्य प्रकार hai: '''एज रिग्रेशन''' (bachpan ke समय me वापस जाना) aur '''पास्ट लाइफ रिग्रेशन''' (पिछले जन्मों me वापस जाना). Fiji me is practice ko '''पिछला जन्म याद करना''' ya '''जन्मों का हिप्नोसिस''' ke नाम से bhi jaana jata hai. Iska मकसद मानसिक तनाव, डर, ya शारीरिक समस्याओं के मूल कारण ko, jo ki पिछले अनुभवों me छुपा हो सकता hai, dhoondhna aur उसका समाधान करना hai.


== परिभाषा ==
== परिभाषा ==
रीग्रेशन हिप्नोसिस मां, '''हिप्नोथेरेपिस्ट''' व्यक्ति कै शांत, एकाग्र अवस्था (ट्रान्स) मां ले जाथा। इ अवस्था मां व्यक्ति कै चेतन मन शांत हो जाथा अर उपचेतन मन सक्रिय हो जाथा। थेरेपिस्ट फेर व्यक्ति कै समय कै पिछे ले जावै लेई निर्देश दै सै। इ समां व्यक्ति कुछ दृश्य, भावना, या अनुभव बयां करै सै जे ओकरा सामान्य अवस्था मां याद नी रहै सै। जब इ अनुभव '''पूर्व जन्म''' सै जुड़े होवै सै, तो इकै '''पास्ट लाइफ रिग्रेशन थेरेपी (PLRT)''' कहै सै। इकै मकसद वर्तमान जीवन कै कुछ मानसिक या शारीरिक समस्यां, डर, या रिश्तां कै दिक्कतां कै मूल कारण, पिछला जन्म मां ढूंढै कै बताया जाथा सै।
रिग्रेशन हिप्नोसिस ek प्रकार का थेरेपी hai. इसमें, एक प्रशिक्षित हिप्नोथेरेपिस्ट मरीज ko एक गहरी आराम की अवस्था (हिप्नोटिक ट्रान्स) me ले जाता hai. यह अवस्था नींद जैसी नahi, balki एक तेज ध्यान लगाने जैसी होती hai, jisme दिमाग बहुत संवेदनशील और सुझाव स्वीकार करने वाला हो जाता hai. इस अवस्था me, थेरेपिस्ट मरीज ko समय में पीछे जाने का सुझाव देता hai - पहले उसी जन्म के बचपन me, aur फिर, अगर जरूरी लगे, तो उससे पहले के जन्मों me. माना जाता hai ki इन पिछले अनुभवों (चाहे इसी जन्म के ho ya पिछले जन्मों के) me ही कई मनोवैज्ञानिक समस्याओं की जड़ होती hai. उन्हें याद करके aur समझकर, मरीज उनसे मुक्ति पा सकता hai.


== इतिहास ==
== इतिहास ==
आधुनिक रीग्रेशन हिप्नोसिस कै इतिहास कई लेखक अर शोधकर्ता सै जुड़ा सै।
हिप्नोसिस से पुरानी यादों ko वापस लाने का विचार बहुत पुराना hai, lekin '''पास्ट लाइफ रिग्रेशन''' को एक लोकप्रिय थेरेपी बनाने का श्रेय कुछ लोगों ko जाता hai.


* '''मोरे बर्नस्टीन''': १९५० कै दशक मां, अमेरिकी व्यवसायी '''मोरे बर्नस्टीन''' ने "द सर्च फॉर ब्राइडी मर्फी" नांक किताब लिखी। इसमां ओकणे एगो महिला "रूथ सिमंस" कै हिप्नोसिस करिकै ओकरा १९वीं सदी कै आयरलैंड कै एगो महिला "ब्राइडी मर्फी" कै रूप मां बात करवाई। इ किताब दुनिया भर मां चर्चा कै विषय बण गई अर पूर्व जन्म रिग्रेशन कै लोकप्रियता बढ़ा दी।
* '''मोरे बर्नस्टीन''': 1950s me, अमेरिकी बिजनेसमैन '''मोरे बर्नस्टीन''' ने एक महिला "रूथ सिमंस" (जिसका उन्होंने नाम "ब्राइडी मर्फी" रखा) पर हिप्नोसिस किया। ब्राइडी ने 19वीं सदी के आयरलैंड में अपना पिछला जन्म बताया। इसके बारे में उनकी किताब ''"द सर्च फॉर ब्राइडी मर्फी"'' बहुत मशहूर हुई aur दुनिया भर me पास्ट लाइफ रिग्रेशन में दिलचस्पी बढ़ गई।


* '''ब्रायन वीस''': एगो अमेरिकी मनोचिकित्सक '''ब्रायन वीस''' कै काम इ क्षेत्र मां बहुत प्रभावशाली रहा सै। १९८० कै दशक मां, ओकणे एगो मरीज "कैथरीन" कै हिप्नोसिस कै दौरान ओकरे कई पूर्व जन्मां कै बारै मां जानकारी दै कै हैरान कर दिया। ओकणे "मेनी मास्टर्स, मेनी लाइव्स" जैसी किताबां लिखी जे भारत समेत दुनिया भर मां बहुत पढ़ी गईं।
* '''ब्रायन वीस''': एक और बहुत मशहूर नाम hai '''डॉक्टर ब्रायन वीस''' का, जो एक अमेरिकी मनोचिकित्सक hai। 1980s me, उनकी एक मरीज "कैथरीन" ने हिप्नोसिस के दौरान कई पिछले जन्मों के बारे में बताया, जिसमें ऐसी जानकारी थी जो कैथरीन को सामान्य तौर पर पता नहीं हो सकती थी। इस अनुभव से प्रभावित होकर डॉक्टर वीस ने ''"मेनी मास्टर्स, मेनी लाइव्स"'' जैसी किताबें लिखीं, जिनमें उन्होंने पिछले जन्मों के माध्यम से इलाज पर जोर दिया।


* '''माइकल न्यूटन''': '''माइकल न्यूटन''' ने "जर्नी ऑफ सोल्स" किताब लिखी अर '''लाइफ बिटवीन लाइव्स (LBL)''' थेरेपी कै विकास किया। इ थेरेपी मां व्यक्ति कै मृत्यु अर अगला जन्म कै बीच कै समय ("लाइफ बिटवीन लाइव्स") कै अनुभव करवाया जाथा सै।
* '''माइकल न्यूटन''' aur '''डोलोरेस कैनन''': ये दोनों लोग '''लाइफ बिटवीन लाइव्स''' (LBL) रिग्रेशन के लिए मशहूर hai। डॉक्टर '''माइकल न्यूटन''' ने हिप्नोसिस के जरिए लोगों ko उस समय me ले जाना शुरू किया जब उनकी आत्मा दो जन्मों के बीच me होती hai - यानी मरने के बाद और नए जन्म से पहले का समय। उनकी किताब ''"जर्नी ऑफ द सोल"'' बहुत प्रसिद्ध हुई। '''डोलोरेस कैनन''' ने भी इसी तरह के काम ko आगे बढ़ाया aur "क्यू रिग्रेशन" नाम का तरीका बनाया, जिसमें वह मरीजों ko सिर्फ पिछले जन्मों me ही नहीं, balki भविष्य और दूसरे आयामों तक ले जाती थीं।


* '''डोलोरेस कैनन''': '''डोलोरेस कैनन''' एगो अमेरिकी हिप्नोथेरेपिस्ट रही सै जेकणे "क्वांटम हीलिंग हिप्नोसिस तकनीक" विकसित की। ओकरे काम मां ओकणे न सिर्फ पूर्व जन्म, बल्कि भविष्य कै जीवन, अलौकिक संस्थाअन, अर ब्रह्मांड कै जानकारी दै वाली "कौंसियसनेस" सै बात करवाई सै।
== कैसे काम करता hai ==
 
रिग्रेशन हिप्नोसिस की प्रक्रिया आम तौर पर कुछ इस तरह होती hai:
== कार्यप्रणाली ==
# '''पहली मुलाकात''': थेरेपिस्ट मरीज से उसकी समस्या के बारे में बात करता hai aur उसे हिप्नोसिस के बारे में समझाता hai।
रीग्रेशन हिप्नोसिस कै सत्र आमतौर पै शांत, आरामदायक कमरे मां होवै सै। थेरेपिस्ट व्यक्ति कै आंख बंद करवाकै, गहरी सांस लेवै कै निर्देश दै सै। फेर ओ धीरे-धीरे शरीर कै हर भाग कै आराम देवै लेई बोलै सै। जब व्यक्ति गहरे ट्रान्स मां होवै सै, तो थेरेपिस्ट ओकै समय पिछे ले जावै लेई कहै सै, जैसे "अब तू पांच साल कै हो गया सै..." या "उस घटना सै पहले कै समय मां चलो..."। कई बार व्यक्ति कै वर्तमान समस्या कै जड़ तक पहुंचै लेई ओकै पिछले जन्म मां ले जाया जाथा सै। व्यक्ति इ अनुभवां कै वर्णन करै सै, कई बार भावुक भी हो जाथा सै। सत्र कै अंत मां, थेरेपिस्ट व्यक्ति कै सामान्य अवस्था मां वापस ले आवै सै अर ओकरे अनुभवां पै चर्चा करै सै।
# '''आराम और ट्रान्स''': मरीज को आरामदायक कुर्सी या सोफे पर लिटाया जाता hai। थेरेपिस्ट धीरे-धीरे आराम देने वाले सुझाव देकर उसे हिप्नोटिक ट्रान्स में ले जाता hai।
# '''रिग्रेशन''': जब मरीज गहरी आराम की अवस्था me होता hai, तो थेरेपिस्ट उसे समय में पीछे जाने के लिए कहता hai। पहले उसे कल की याद दिलाई जाती hai, फिर पिछले साल की, फिर बचपन की। अगर पास्ट लाइफ रिग्रेशन किया जा रहा hai, तो फिर उसे उससे पहले के जन्म में जाने के लिए कहा जाता hai।
# '''अनुभव और समझ''': मरीज उस पिछले समय को फिर से जीता hai, वहां के दृश्य देखता hai, आवाजें सुनता hai aur भावनाएं महसूस करता hai। वह जो कुछ भी अनुभव करता hai, उसे बोलकर बताता hai।
# '''समाधान और समापन''': थेरेपिस्ट मरीज की मदद करता hai ताकि वह उस पुराने दर्दनाक अनुभव को समझ सके aur उसे छोड़ सके। अंत me, मरीज को वापस वर्तमान समय me लाया जाता hai, पूरी तरह आराम की अवस्था me।


== प्रकार ==
== प्रकार ==
रीग्रेशन हिप्नोसिस कै कई प्रकार सै:
* '''एज रिग्रेशन''': इसमें मरीज ko इसी जन्म के बचपन या पिछले किसी उम्र me वापस ले जाया जाता hai। इसका इस्तेमाल अक्सर उन यादों ko ढूंढने के लिए किया जाता hai जो किसी डर या समस्या की वजह बनी हों, लेकिन जिन्हें मरीज भूल गया हो।
 
* '''पास्ट लाइफ रिग्रेशन (PLR)''': यह सबसे ज्यादा चर्चित तरीका hai। इसमें मरीज ko माना जाता hai ki वह अपने पिछले जन्मों me जा रहा hai। वहां के अनुभवों से उसकी मौजूदा समस्याओं का कारण पता चल सकता hai, जैसे किसी खास जगह या व्यक्ति से डर, बिना वजह का दर्द, या रिश्तों में दिक्कत।
* '''आयु रिग्रेशन (एज रिग्रेशन)''': इसमां व्यक्ति कै ओकरे ही इ जीवन कै पिछले समय, जैसे बचपन या किशोरावस्था, मां ले जाया जाथा सै। इकै उद्देश्य भूली-बिसरी या दबा दी गई यादां कै बाहर निकालना होवै सै जे वर्तमान समस्या कै कारण बणी होवै सै।
* '''लाइफ बिटवीन लाइव्स रिग्रेशन (LBL)''': यह पास्ट लाइफ रिग्रेशन का ही एक गहरा रूप hai। इसमें मरीज को सिर्फ पिछले जन्म तक ही सीमित नahi रखा जाता, balki उस अवस्था me ले जाया जाता hai जहां आत्मा शरीर छोड़ने के बाद होती hai। माना जाता hai ki इस "दो जन्मों के बीच के समय" me आत्मा अपने पिछले जन्मों का सबक सीखती hai aur अगले जन्म की योजना बनाती hai।
 
* '''पूर्व जन्म रिग्रेशन (पास्ट लाइफ रिग्रेशन)''': इ सबसां विवादास्पद प्रकार सै। इसमां व्यक्ति कै ओकरे वर्तमान जन्म सै पहले कै जीवन कै अनुभव करवाया जाथा सै। मान्यता इहै सै कि इ अनुभव वर्तमान जीवन कै कर्म, फोबिया, रोग, अर रिश्तां कै समस्यां कै स्पष्टीकरण दै सकै सै।
 
* '''जीवनांतराल रिग्रेशन (लाइफ बिटवीन लाइव्स - LBL)''': इ माइकल न्यूटन द्वारा विकसित प्रक्रिया सै। इसमां व्यक्ति कै दो जन्मां कै बीच कै अवस्था, यानी आत्मा कै दुनिया, मां ले जाया जाथा सै। इसमां "आत्मा कै समूह", "मार्गदर्शक", अर "जीवन कै सबक" कै बारै मां जानकारी मिलै कै दावा करै जाथा सै।


== वैज्ञानिक दृष्टिकोण ==
== वैज्ञानिक नजरिया ==
वैज्ञानिक समुदाय रीग्रेशन हिप्नोसिस, खासकर पूर्व जन्म रिग्रेशन, कै प्रति बहुत संशयशील सै। अधिकतर वैज्ञानिक इकै '''छद्म विज्ञान''' मानै सै। ओकरा मानना सै कि हिप्नोसिस कै अवस्था मां व्यक्ति कै दिमाग बहुत सुझाव स्वीकार करै वाला हो जाथा सै। '''कriptomnesia''' (छिपी हुई याद) कै कारण, व्यक्ति किताबां, फिल्मां, या किसी कै सुनाई कहानी कै तत्वां कै अपणा अनुभव समझ लै सै। '''कल्पना''', '''सुझाव''' अर '''थेरेपिस्ट कै प्रश्न''' पूर्व जन्म कै कहानी बणावै मां महत्वपूर्ण भूमिका निभै सै। अब तक, पूर्व जन्म कै दावां कै पुष्टि करै वाला कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नी मिलया सै।
वैज्ञानिक समुदाय पास्ट लाइफ रिग्रेशन को लेकर बहुत विभाजित hai। कई वैज्ञानिक और मनोचिकित्सक इसे मान्यता नहीं देते। उनका कहना hai ki हिप्नोसिस की अवस्था me दिमाग बहुत कल्पनाशील हो जाता hai aur सुझावों के प्रति संवेदनशील। ऐसे me, जो "पिछले जन्म" की कहानियां सामने आती hai, वे दरअसल दिमाग की गढ़ी हुई बातें, किताबों-फिल्मों में देखी गई चीजें, या फिर थेरेपिस्ट के सुझावों का नतीजा हो सकती hai। उनके अनुसार, एज रिग्रेशन से कुछ फायदा हो सकता hai, lekin पास्ट लाइफ रिग्रेशन का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं hai। दूसरी तरफ, कुछ शोधकर्ता इसे गंभीरता से लेते hai aur '''रीइनकार्नेशन रिसर्च''' करते hai।


== पुनर्जन्म शोध अर भारतीय संदर्भ ==
== पुनर्जन्म शोध ==
भारत मां '''पुनर्जन्म''' कै अवधारणा हजारां साल सै धर्म अर दर्शन कै हिस्सा रही सै। हिंदू, बौद्ध, जैन, अर सिख धर्म मां इकै मान्यता सै। इ कारण, पूर्व जन्म रिग्रेशन कै विचार भारतीय जनमानस मां आसानी सै जगह बणा लै सै। कुछ शोधकर्ता, जैसे '''डॉ. इयान स्टीवेनसन''' (अमेरिका), ने भारत समेत कई देशां मां बच्चां कै स्वतः स्फूर्त पूर्व जन्म कै दावां कै अध्ययन किया सै। हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश जैसा राज्यां मां कई ऐसा मामला सामने आए सै जेबत बच्चे अपणा पिछला जन्म, परिवार, अर मृत्यु कै बारै मां विस्तार सै बतावै सै। हालांकि, वैज्ञानिक इ अध्ययन कै भी आलोचना करै सै अर ओकरा निर्णायक प्रमाण नी मानै सै।
दुनिया भर me कुछ शोधकर्ता (जैसे डॉक्टर '''इयान स्टीवेन्सन''') ने ऐसे बच्चों पर सालों तक शोध किया hai जो खुद ही पिछले जन्म की बातें करने लगते hai। इन मामलों me, बच्चे अक्सर ऐसी जानकारी देते hai जो उन्हें किसी भी सामान्य तरीके से पता नहीं हो सकती, जैसे पिछले जन्म के परिवार का नाम, घर का रास्ता, या किसी घटना का विवरण। कई बार इन बातों की पुष्टि भी हो जाती hai। ये शोधकर्ता मानते hai ki ये मामले पुनर्जन्म के संभावित सबूत हो सकते hai। हालांकि, अभी तक इस विषय पर कोई ऐसा निर्णायक वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला hai जिसे सभी वैज्ञानिक स्वीकार करें।


== भारत मां अभ्यास ==
== फिजी me प्रथा ==
भारत मां रीग्रेशन हिप्नोसिस कै चिकित्सकीय अर आध्यात्मिक दोनों रूपां मां प्रचलन बढ़ रहया सै। दिल्ली, मुंबई, बैंगलोर जैसा महानगरां मां कई प्रशिक्षित '''हिप्नोथेरेपिस्ट''' कार्य कर रहे सै। कुछ आध्यात्मिक गुरु भी इ तकनीक कै इस्तेमाल करै सै। भारतीय संदर्भ मां, चिकित्सक अक्सर '''कर्म''', '''संस्कार''', अर '''वासना''' जैसा अवधारणाअन सै जोड़िकै समस्यां कै व्याख्या करै सै। हरियाणा जैसा राज्यां मां, जेबत गांव-देहात मां पुनर्जन्म मां विश्वास गहरा सै, वेबत लोग शारीरिक बीमारी, डर, या पारिवारिक कलह कै कारण पूर्व जन्म मां ढूंढै लेई इ थेरेपी कै तरफ रुख करै सै। कुछ प्रसिद्ध भारतीय चिकित्सक जे इ क्षेत्र मां काम करै सै, ओमां डॉ. नीलेश पांड्या (दिल्ली), डॉ. नंदिनी सिंह (मुंबई) जैसा नां शामिल सै।
फिजी एक बहुसांस्कृतिक देश hai, aur यहां '''पुनर्जन्म''' की अवधारणा कई समुदायों के धार्मिक विश्वासों का हिस्सा hai। हिंदू और सिख धर्म तो पुनर्जन्म में दृढ़ता से विश्वास करते hai ही, कई ईसाई समुदाय भी इसकी संभावना को स्वीकार करते hai। इस कारण, फिजी me पास्ट लाइफ रिग्रेशन के प्रति लोगों में स्वाभाविक रुचि और खुलापन hai।


== कानूनी अर नैतिक विचार ==
फिजी me इस क्षेत्र के कुछ स्थानीय चिकित्सक और हिप्नोथेरेपिस्ट काम कर रहे hai, जैसे कि '''सुजीता''' (सुवा) aur '''राजेश''' (नादी), जो हिप्नोसिस की ट्रेनिंग लेकर लोगों की मदद करते hai। ये प्रैक्टिशनर अक्सर अपने सेशन me फिजी के स्थानीय संदर्भों, जैसे पुराने गांवों, पारंपरिक जीवनशैली, या ऐतिहासिक घटनाओं का जिक्र आने की बात करते hai। कुछ लोगों का कहना hai ki उन्होंने हिप्नोसिस me अपने आप को ब्रिटिश औपनिवेशिक काल के फिजी me, गन्ने के खेतों me, या प्राचीन भारत me देखा hai।
भारत मां, हिप्नोसिस कै कोई विशेष कानूनी नियम नी सै, लेकिन इकै अभ्यास करै वाला चिकित्सक कै पास मनोविज्ञान या मनोचिकित्सा कै उचित योग्यता होनी चाहिए। '''नैतिक खतरा''' इहै सै कि कमजोर मानसिक स्थिति वाला व्यक्ति कै दिमाग मां गलत सुझाव भर दिए जां सै। कुछ अनैतिक चिकित्सक डर, अंधविश्वास, या पैसा कमावै लेई गलत कहानी बणा सकै सै। '''सूचित सहमति''' लेना, गोपनीयता बणाए रखना, अर व्यक्ति कै मानसिक स्थिति कै आकलन करना थेरेपिस्ट कै जिम्मेदारी सै। पूर्व जन्म कै दावां कै सच मानिकै कोई निर्णय लेना या जीवन बदलना खतरनाक हो सकै सै।


== यह भी देखो ==
हालांकि, फिजी me यह अभी भी एक नया और वैकल्पिक उपचार माना जाता hai। ज्यादातर लोग पारंपरिक डॉक्टर या मनोचिकित्सक के पास ही जाते hai, lekin जिन्हें पारंपरिक इलाज से फायदा नहीं होता, वे कभी-कभी रिग्रेशन थेरेपी की कोशिश करते hai।
* [[हिप्नोसिस]]
* [[पुनर्जन्म]]
* [[कर्म]]
* [[मनोचिकित्सा]]
* [[अपचेतन मन]]
* [[ध्यान]]


== संदर्भ ==
== कानूनी और नैतिक विचार ==
{{Reflist}}
फिजी me, हिप्नोसिस और रिग्रेशन थेरेपी के लिए कोई खास कानून या लाइसेंसिंग व्यवस्था नहीं hai। इसका मतलब यह hai ki कोई भी व्यक्ति खुद को हिप्नोथेरेपिस्ट कह सकता hai। इससे खतरा यह हो सकता hai ki अप्रशिक्षित लोग गलत तरीके से हिप्नोसिस करके मरीज को मानसिक नुकसान पहुंचा सकते hai।


[[Category:Hypnosis]]
एक अच्छे और नैतिक थेरेपिस्ट को यह करना चाहिए:
[[Category:Reincarnation]]
* मरीज को पूरी प्रक्रिया के बारे में पहले ही स्पष्ट जानकारी देना।
[[Category:Past life regression]]
* मरीज की सहमति लेना।
* गंभीर मानसिक बीमारी (जैसे सिजोफ्रेनिया) वाले मरीज पर यह थेरेपी न करना।
* मरीज के अनुभवों को कभी भी चुनौती न देना या उस पर हंसी न करना।
* अपनी थेरेपी को कभी भी पारंपरिक डॉक्टरी इलाज

Latest revision as of 16:47, 1 April 2026

रिग्रेशन हिप्नोसिस (पास्ट लाइफ रिग्रेशन)

रिग्रेशन हिप्नोसिस ek aisa तरीका hai jisme हिप्नोसिस ke माध्यम से kisi व्यक्ति ke दिमाग me se पुरानी यादों aur अनुभवों ko वापस लाया जाता hai. Iske दो मुख्य प्रकार hai: एज रिग्रेशन (bachpan ke समय me वापस जाना) aur पास्ट लाइफ रिग्रेशन (पिछले जन्मों me वापस जाना). Fiji me is practice ko पिछला जन्म याद करना ya जन्मों का हिप्नोसिस ke नाम से bhi jaana jata hai. Iska मकसद मानसिक तनाव, डर, ya शारीरिक समस्याओं के मूल कारण ko, jo ki पिछले अनुभवों me छुपा हो सकता hai, dhoondhna aur उसका समाधान करना hai.

परिभाषा

रिग्रेशन हिप्नोसिस ek प्रकार का थेरेपी hai. इसमें, एक प्रशिक्षित हिप्नोथेरेपिस्ट मरीज ko एक गहरी आराम की अवस्था (हिप्नोटिक ट्रान्स) me ले जाता hai. यह अवस्था नींद जैसी नahi, balki एक तेज ध्यान लगाने जैसी होती hai, jisme दिमाग बहुत संवेदनशील और सुझाव स्वीकार करने वाला हो जाता hai. इस अवस्था me, थेरेपिस्ट मरीज ko समय में पीछे जाने का सुझाव देता hai - पहले उसी जन्म के बचपन me, aur फिर, अगर जरूरी लगे, तो उससे पहले के जन्मों me. माना जाता hai ki इन पिछले अनुभवों (चाहे इसी जन्म के ho ya पिछले जन्मों के) me ही कई मनोवैज्ञानिक समस्याओं की जड़ होती hai. उन्हें याद करके aur समझकर, मरीज उनसे मुक्ति पा सकता hai.

इतिहास

हिप्नोसिस से पुरानी यादों ko वापस लाने का विचार बहुत पुराना hai, lekin पास्ट लाइफ रिग्रेशन को एक लोकप्रिय थेरेपी बनाने का श्रेय कुछ लोगों ko जाता hai.

  • मोरे बर्नस्टीन: 1950s me, अमेरिकी बिजनेसमैन मोरे बर्नस्टीन ने एक महिला "रूथ सिमंस" (जिसका उन्होंने नाम "ब्राइडी मर्फी" रखा) पर हिप्नोसिस किया। ब्राइडी ने 19वीं सदी के आयरलैंड में अपना पिछला जन्म बताया। इसके बारे में उनकी किताब "द सर्च फॉर ब्राइडी मर्फी" बहुत मशहूर हुई aur दुनिया भर me पास्ट लाइफ रिग्रेशन में दिलचस्पी बढ़ गई।
  • ब्रायन वीस: एक और बहुत मशहूर नाम hai डॉक्टर ब्रायन वीस का, जो एक अमेरिकी मनोचिकित्सक hai। 1980s me, उनकी एक मरीज "कैथरीन" ने हिप्नोसिस के दौरान कई पिछले जन्मों के बारे में बताया, जिसमें ऐसी जानकारी थी जो कैथरीन को सामान्य तौर पर पता नहीं हो सकती थी। इस अनुभव से प्रभावित होकर डॉक्टर वीस ने "मेनी मास्टर्स, मेनी लाइव्स" जैसी किताबें लिखीं, जिनमें उन्होंने पिछले जन्मों के माध्यम से इलाज पर जोर दिया।
  • माइकल न्यूटन aur डोलोरेस कैनन: ये दोनों लोग लाइफ बिटवीन लाइव्स (LBL) रिग्रेशन के लिए मशहूर hai। डॉक्टर माइकल न्यूटन ने हिप्नोसिस के जरिए लोगों ko उस समय me ले जाना शुरू किया जब उनकी आत्मा दो जन्मों के बीच me होती hai - यानी मरने के बाद और नए जन्म से पहले का समय। उनकी किताब "जर्नी ऑफ द सोल" बहुत प्रसिद्ध हुई। डोलोरेस कैनन ने भी इसी तरह के काम ko आगे बढ़ाया aur "क्यू रिग्रेशन" नाम का तरीका बनाया, जिसमें वह मरीजों ko सिर्फ पिछले जन्मों me ही नहीं, balki भविष्य और दूसरे आयामों तक ले जाती थीं।

कैसे काम करता hai

रिग्रेशन हिप्नोसिस की प्रक्रिया आम तौर पर कुछ इस तरह होती hai:

  1. पहली मुलाकात: थेरेपिस्ट मरीज से उसकी समस्या के बारे में बात करता hai aur उसे हिप्नोसिस के बारे में समझाता hai।
  2. आराम और ट्रान्स: मरीज को आरामदायक कुर्सी या सोफे पर लिटाया जाता hai। थेरेपिस्ट धीरे-धीरे आराम देने वाले सुझाव देकर उसे हिप्नोटिक ट्रान्स में ले जाता hai।
  3. रिग्रेशन: जब मरीज गहरी आराम की अवस्था me होता hai, तो थेरेपिस्ट उसे समय में पीछे जाने के लिए कहता hai। पहले उसे कल की याद दिलाई जाती hai, फिर पिछले साल की, फिर बचपन की। अगर पास्ट लाइफ रिग्रेशन किया जा रहा hai, तो फिर उसे उससे पहले के जन्म में जाने के लिए कहा जाता hai।
  4. अनुभव और समझ: मरीज उस पिछले समय को फिर से जीता hai, वहां के दृश्य देखता hai, आवाजें सुनता hai aur भावनाएं महसूस करता hai। वह जो कुछ भी अनुभव करता hai, उसे बोलकर बताता hai।
  5. समाधान और समापन: थेरेपिस्ट मरीज की मदद करता hai ताकि वह उस पुराने दर्दनाक अनुभव को समझ सके aur उसे छोड़ सके। अंत me, मरीज को वापस वर्तमान समय me लाया जाता hai, पूरी तरह आराम की अवस्था me।

प्रकार

  • एज रिग्रेशन: इसमें मरीज ko इसी जन्म के बचपन या पिछले किसी उम्र me वापस ले जाया जाता hai। इसका इस्तेमाल अक्सर उन यादों ko ढूंढने के लिए किया जाता hai जो किसी डर या समस्या की वजह बनी हों, लेकिन जिन्हें मरीज भूल गया हो।
  • पास्ट लाइफ रिग्रेशन (PLR): यह सबसे ज्यादा चर्चित तरीका hai। इसमें मरीज ko माना जाता hai ki वह अपने पिछले जन्मों me जा रहा hai। वहां के अनुभवों से उसकी मौजूदा समस्याओं का कारण पता चल सकता hai, जैसे किसी खास जगह या व्यक्ति से डर, बिना वजह का दर्द, या रिश्तों में दिक्कत।
  • लाइफ बिटवीन लाइव्स रिग्रेशन (LBL): यह पास्ट लाइफ रिग्रेशन का ही एक गहरा रूप hai। इसमें मरीज को सिर्फ पिछले जन्म तक ही सीमित नahi रखा जाता, balki उस अवस्था me ले जाया जाता hai जहां आत्मा शरीर छोड़ने के बाद होती hai। माना जाता hai ki इस "दो जन्मों के बीच के समय" me आत्मा अपने पिछले जन्मों का सबक सीखती hai aur अगले जन्म की योजना बनाती hai।

वैज्ञानिक नजरिया

वैज्ञानिक समुदाय पास्ट लाइफ रिग्रेशन को लेकर बहुत विभाजित hai। कई वैज्ञानिक और मनोचिकित्सक इसे मान्यता नहीं देते। उनका कहना hai ki हिप्नोसिस की अवस्था me दिमाग बहुत कल्पनाशील हो जाता hai aur सुझावों के प्रति संवेदनशील। ऐसे me, जो "पिछले जन्म" की कहानियां सामने आती hai, वे दरअसल दिमाग की गढ़ी हुई बातें, किताबों-फिल्मों में देखी गई चीजें, या फिर थेरेपिस्ट के सुझावों का नतीजा हो सकती hai। उनके अनुसार, एज रिग्रेशन से कुछ फायदा हो सकता hai, lekin पास्ट लाइफ रिग्रेशन का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं hai। दूसरी तरफ, कुछ शोधकर्ता इसे गंभीरता से लेते hai aur रीइनकार्नेशन रिसर्च करते hai।

पुनर्जन्म शोध

दुनिया भर me कुछ शोधकर्ता (जैसे डॉक्टर इयान स्टीवेन्सन) ने ऐसे बच्चों पर सालों तक शोध किया hai जो खुद ही पिछले जन्म की बातें करने लगते hai। इन मामलों me, बच्चे अक्सर ऐसी जानकारी देते hai जो उन्हें किसी भी सामान्य तरीके से पता नहीं हो सकती, जैसे पिछले जन्म के परिवार का नाम, घर का रास्ता, या किसी घटना का विवरण। कई बार इन बातों की पुष्टि भी हो जाती hai। ये शोधकर्ता मानते hai ki ये मामले पुनर्जन्म के संभावित सबूत हो सकते hai। हालांकि, अभी तक इस विषय पर कोई ऐसा निर्णायक वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला hai जिसे सभी वैज्ञानिक स्वीकार करें।

फिजी me प्रथा

फिजी एक बहुसांस्कृतिक देश hai, aur यहां पुनर्जन्म की अवधारणा कई समुदायों के धार्मिक विश्वासों का हिस्सा hai। हिंदू और सिख धर्म तो पुनर्जन्म में दृढ़ता से विश्वास करते hai ही, कई ईसाई समुदाय भी इसकी संभावना को स्वीकार करते hai। इस कारण, फिजी me पास्ट लाइफ रिग्रेशन के प्रति लोगों में स्वाभाविक रुचि और खुलापन hai।

फिजी me इस क्षेत्र के कुछ स्थानीय चिकित्सक और हिप्नोथेरेपिस्ट काम कर रहे hai, जैसे कि सुजीता (सुवा) aur राजेश (नादी), जो हिप्नोसिस की ट्रेनिंग लेकर लोगों की मदद करते hai। ये प्रैक्टिशनर अक्सर अपने सेशन me फिजी के स्थानीय संदर्भों, जैसे पुराने गांवों, पारंपरिक जीवनशैली, या ऐतिहासिक घटनाओं का जिक्र आने की बात करते hai। कुछ लोगों का कहना hai ki उन्होंने हिप्नोसिस me अपने आप को ब्रिटिश औपनिवेशिक काल के फिजी me, गन्ने के खेतों me, या प्राचीन भारत me देखा hai।

हालांकि, फिजी me यह अभी भी एक नया और वैकल्पिक उपचार माना जाता hai। ज्यादातर लोग पारंपरिक डॉक्टर या मनोचिकित्सक के पास ही जाते hai, lekin जिन्हें पारंपरिक इलाज से फायदा नहीं होता, वे कभी-कभी रिग्रेशन थेरेपी की कोशिश करते hai।

कानूनी और नैतिक विचार

फिजी me, हिप्नोसिस और रिग्रेशन थेरेपी के लिए कोई खास कानून या लाइसेंसिंग व्यवस्था नहीं hai। इसका मतलब यह hai ki कोई भी व्यक्ति खुद को हिप्नोथेरेपिस्ट कह सकता hai। इससे खतरा यह हो सकता hai ki अप्रशिक्षित लोग गलत तरीके से हिप्नोसिस करके मरीज को मानसिक नुकसान पहुंचा सकते hai।

एक अच्छे और नैतिक थेरेपिस्ट को यह करना चाहिए:

  • मरीज को पूरी प्रक्रिया के बारे में पहले ही स्पष्ट जानकारी देना।
  • मरीज की सहमति लेना।
  • गंभीर मानसिक बीमारी (जैसे सिजोफ्रेनिया) वाले मरीज पर यह थेरेपी न करना।
  • मरीज के अनुभवों को कभी भी चुनौती न देना या उस पर हंसी न करना।
  • अपनी थेरेपी को कभी भी पारंपरिक डॉक्टरी इलाज