प्रतिगमन सम्मोहन
पिछला जन्म सम्मोहन (अंग्रेजी: Regression Hypnosis), जेकरा पूर्वजन्म सम्मोहन या पिछला जन्म थेरेपी के नाम से भी जाणै जात है, एगो विशेष सम्मोहन तकनीक है जेकरा में व्यक्ति के मन के गहरे स्तर तक पहुंच के उनरा बीते हुए समय के याद (आयु प्रतिगमन) या पिछले जन्म के अनुभव (पूर्वजन्म प्रतिगमन) के जांच करै है। ए तकनीक मुख्य रूप से मानसिक तनाव, फोबिया, या अबूझे शारीरिक दर्द के मूल कारण ढूंढै और उनरा समाधान करै खातिर प्रयोग होत है। भारत में, जहां पुनर्जन्म के धारणा सदियों से सांस्कृतिक और धार्मिक विश्वास के हिस्सा रही है, ए विधा के प्रति विशेष रुचि और स्वीकार्यता देखै मिलै है।
परिभाषा
पिछला जन्म सम्मोहन एगो चिकित्सीय प्रक्रिया है जेमें प्रशिक्षित चिकित्सक (सम्मोहन चिकित्सक) व्यक्ति के सम्मोहन की अवस्था में ले जात है। ए अवस्था में व्यक्ति का चेतन मन शांत हो जात है और अवचेतन मन के साथ सीधा संवाद होत है। चिकित्सक के निर्देशन में व्यक्ति अपने वर्तमान जीवन के बीते हुए पल या फिर पिछले जन्म के अनुभव के बारे में बतावै लागै है। ए अनुभव बहुत ही सजीव और वास्तविक लागै है, जेमें व्यक्ति को दृश्य, ध्वनि, गंध और भावना सब कुछ महसूस होत है। ए प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य चिकित्सा है, मनोरंजन नाई। ए के द्वारा वर्तमान जीवन के कुछ मनोवैज्ञानिक या शारीरिक समस्याओं के मूल को पिछले अनुभवों में ढूंढ के उनरा समाधान करै का प्रयास किया जात है।
इतिहास
सम्मोहन के इतिहास तो बहुत पुराना है, लेकिन पिछला जन्म के साथ एनो जोड़ के चिकित्सा के रूप में प्रचलन २०वीं सदी के मध्य में शुरू भयो।
- मोरे बर्नस्टीन: सन् १९५२ में अमेरिकी व्यवसायी और सम्मोहन चिकित्सक मोरे बर्नस्टीन ने "रूथ सिमंस" नामक महिला पर सम्मोहन प्रयोग किया, जेकरा में ओ "ब्राइडी मर्फी" के रूप में पिछले जन्म के अनुभव बताया। ए केस पर लिखी गई किताब "द सर्च फॉर ब्राइडी मर्फी" दुनिया भर में चर्चित भई और पश्चिमी दुनिया में पूर्वजन्म सम्मोहन के बारे में जागरूकता फैलाई।
- ब्रायन वीस: सन् १९८० के दशक में अमेरिकी मनोचिकित्सक ब्रायन वीस ने अपनी मरीज "कैथरीन" के साथ काम करते हुए ए विधा को नया आयाम दिया। ओ अपने पारंपरिक चिकित्सा दृष्टिकोण के बावजूद, सम्मोहन में कैथरीन के पिछले जन्म के विवरण और उनरा वर्तमान समस्याओं के बीच संबंध देखै। ओनो अपनी किताब "मेनी लाइव्स, मेनी मास्टर्स" में ए अनुभव लिखै, जेकरा बाद पूर्वजन्म चिकित्सा मुख्यधारा के चर्चा में आई।
- माइकल न्यूटन और डोलोरेस कैनन: ए दुनो शोधकर्ता ने पिछला जन्म से भी आगे जा के लाइफ बिटवीन लाइव्स (LBL) यानी दो जन्मों के बीच की अवस्था के अध्ययन किया। न्यूटन ने "जर्नी ऑफ सोल्स" और कैनन ने "कन्वर्सेशन विद नोस्ट्रादमस" जैसी किताब लिख के ए दावा किया कि सम्मोहन में आत्मा से सीधा संवाद कर के जीवन के उद्देश्य और ब्रह्मांड के रहस्य के बारे में जाणै जा सकत है।
कार्यप्रणाली
पिछला जन्म सम्मोहन की प्रक्रिया में कई चरण होत है: १. प्रारंभिक परामर्श: चिकित्सक और व्यक्ति के बीच विश्वास का रिश्ता बनावै। समस्या और उम्मीदों के बारे में चर्चा होत है। २. आराम और सम्मोहन प्रेरण: व्यक्ति को आरामदायक स्थिति में बिठाया या लिटाया जात है। फिर कोमल आवाज में, श्वास पर ध्यान केंद्रित करावै, शरीर के अंग-अंग को शिथिल करावै के निर्देश दिए जात है, जेसे कि व्यक्ति सम्मोहन की तंद्रा अवस्था में चला जात है। ३. प्रतिगमन (रिग्रेशन): चिकित्सक व्यक्ति को उनरा वर्तमान उम्र से पीछे ले जात है, क्रमशः बचपन की याद दिलावै। फिर ओनो जन्म के समय और फिर उनरा मां के गर्भ में होने के अनुभव के बारे में पूछत है। ए के बाद, यदि आवश्यक लागै, तो चिकित्सक व्यक्ति को "उस समय से भी पहले" जाने के लिए कहत है, जहां से पिछले जन्म के अनुभव सामने आ सकत है। ४. अनुभव की जांच और चिकित्सा: व्यक्ति जो दृश्य देखत है या अनुभव करत है, ओनो विस्तार से बतावै लागै। चिकित्सक ए अनुभव के वर्तमान समस्या से जोड़ के देखत है और आवश्यक सलाह या "संदेश" दे के मन के भार को हल्का करै का प्रयास करत है। ५. सम्मोहन से बाहर आणै: प्रक्रिया पूरी होने पर, चिकित्सक व्यक्ति को धीरे-धीरे वर्तमान समय और स्थान में वापस ले आवै है, ओनो आराम और ताजगी महसूस करावै।
प्रकार
प्रतिगमन सम्मोहन के मुख्य रूप से तीन प्रकार माने जात है:
- आयु प्रतिगमन: ए में व्यक्ति को उनरा वर्तमान जीवन के पिछले चरणों में, जैसे बचपन या किशोरावस्था में, ले जाया जात है। ए तकनीक अक्सर भूली हुई या दबा हुई यादों, जेकरा ट्रॉमा का कारण बनी हो, ओनो सामने लावै खातिर प्रयोग होत है।
- पूर्वजन्म प्रतिगमन: ए सबसे चर्चित प्रकार है। इसमें व्यक्ति के वर्तमान जन्म से पहले के कथित जीवन अनुभवों तक पहुंचै का प्रयास किया जात है। मान्यता है कि वर्तमान जीवन के डर, रिश्तों की समस्या, या अबूझी आदतों का कारण पिछले जन्म के अनुभवों में छिपा हो सकत है।
- जीवनांतराल प्रतिगमन (LBL): ए प्रक्रिया में पिछले जन्म के बाद की अवस्था, यानी आत्मा के दो जन्मों के बीच के समय ("लाइफ बिटवीन लाइव्स") के अनुभव के बारे में पूछत है। ए में आत्मा के गाइड, शिक्षा, या भविष्य के जीवन की योजना के बारे में जानकारी मिलने के दावे किए जात है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण
वैज्ञानिक समुदाय पिछला जन्म सम्मोहन के प्रति बहुत ही संशयात्मक रवैया रखत है। अधिकांश वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक ए मानते है कि सम्मोहन की अवस्था में दिखाई देने वाले "पिछले जन्म" के दृश्य वास्तव में नाई होके व्यक्ति के कल्पना, सुझाव के प्रति संवेदनशीलता, या फिर फैंटेसी प्रोननेस के कारण उत्पन्न होत है। ओनो मानत है कि ये सब दृश्य फिल्मों, किताबों, कहानियों, या सामाजिक बातचीत से प्राप्त जानकारी के आधार पर अवचेतन मन द्वारा गढ़े जात है। मनोविज्ञान में क्रिप्टोमनेसिया (भूली हुई याद का सही स्रोत भूल जाणै) और कन्फैब्युलेशन (खाली जगह को काल्पनिक विवरण से भर देना) जैसी घटनाओं को ए अनुभवों का कारण माना जात है। अभी तक कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है जे साबित करै कि सम्मोहन में प्राप्त अनुभव वास्तव में पिछले जन्म के है।
पुनर्जन्म शोध और भारतीय संदर्भ
भारत में पुनर्जन्म के विचार पर परंपरागत रूप से विश्वास रहा है। धर्मशास्त्र और दर्शन में कर्म और पुनर्जन्म के सिद्धांत गहराई से वर्णित है। ए कारण, पश्चिम की तुलना में भारत में पिछला जन्म सम्मोहन के प्रति रुचि अधिक स्वाभाविक है। भारत में डॉ. सत्यवती मोदी और डॉ. एच.एन. बनर्जी जैसे शोधकर्ता ने पुनर्जन्म के दावा करने वाले बच्चों (जैसे कि प्रसिद्ध केस शांति देवी) पर व्यवस्थित अध्ययन किया है। हालांकि, ए शोध में भी सम्मोहन का प्रयोग सीमित है और ज्यादातर जागृत अवस्था में साक्षात्कार और तथ्यों की जांच पर निर्भर है। भारतीय संदर्भ में, पिछले जन्म की बात अक्सर जाति-स्मृति या परिवार के पूर्वजों से जोड़ के देखी जात है, जेकरा चिकित्सीय प्रक्रिया में एक अलग आयाम जोड़ देत है।
भारत में अभ्यास
भारत में पिछला जन्म सम्मोहन चिकित्सा का अभ्यास बढ़ रहा है। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई जैसे महानगरों में कई प्रशिक्षित चिकित्सक क्लिनिक चलावै है। कुछ चिकित्सक तो अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से प्रमाणित है। भारतीय दर्शन के कारण लोग ए विधा के प्रति खुले है, और कई लोग आध्यात्मिक जिज्ञासा या मानसिक कष्टों से मुक्ति पावै खातिर ए सेवा लेत है। हिंदी, अंग्रेजी के अलावा क्षेत्रीय भाषाओं में भी ए चिकित्सा उपलब्ध होत है। कुछ योग और ध्यान के केंद्र भी सम्मोहन चिकित्सा के कार्यशाला आयोजित करत है। हालांकि, ए क्षेत्र में अभी कोई केंद्रीय विनियमन नहीं है, इसलिए चिकित्सक की योग्यता और नैतिकता पर ग्राहक को स्वयं सावधान रहणै की जरूरत है।
कानूनी और नैतिक विचार
भारत में पिछला जन्म सम्मोहन चिकित्सा के लिए कोई विशेष कानून नहीं है। ओ मुख्य रूप से मनोरंजन या वैकल्पिक चिकित्सा के दायरे में आवै है, न कि मुख्यधारा की चिकित्सा के। ए खतरा हमेशा बना रहत है कि कोई अप्रशिक्षित व्यक्ति सम्मोहन कर के ग्राहक के मन में गलत सुझाव भर दे या उनका आर्थिक या भावनात्मक शोषण करै। इसलिए नैतिक रूप से, हर चिकित्सक को ये बताणै जरूरी है कि ए प्रक्रिया प्रायोगिक है और इसके परिणाम गारंटीड नहीं है। ग्राहक की गोपनीयता बनाए रखणै, उनरा विश्वास का दुरुपयोग न करणै, और उन्हें भयभीत करणै वाली बातें न कहणै जरूरी है। गंभीर मानसिक रोग (जैसे सिजोफ्रेनिया, बाइपोलर डिसऑर्डर) से पीड़ित व्यक्तियों पर ए तकनीक का