प्रतिगमन सम्मोहन
पिछले जन्म का सम्मोहन (रिग्रेशन हिप्नोसिस)
पिछले जन्म का सम्मोहन (अंग्रेजी: Past Life Regression Therapy, PLR) एक प्रकार की सम्मोहन चिकित्सा है, जिसमें व्यक्ति को सम्मोहन की गहरी अवस्था में ले जाकर उसकी स्मृतियों को वर्तमान से पीछे, बचपन की ओर और फिर कथित रूप से पिछले जन्मों की ओर ले जाया जाता है। इसका उद्देश्य वर्तमान जीवन की शारीरिक, मानसिक या भावनात्मक समस्याओं के मूल कारण को खोजना और उनका समाधान करना माना जाता है। यह अक्सर आत्मा चिकित्सा या रिग्रेशन थेरेपी के नाम से भी जानी जाती है।
परिभाषा
रिग्रेशन हिप्नोसिस एक ऐसी प्रक्रिया है जहाँ एक प्रशिक्षित चिकित्सक या सम्मोहनकार (हिप्नोथेरेपिस्ट) किसी व्यक्ति को सम्मोहित अवस्था में ले जाता है। इस अवस्था में व्यक्ति की चेतना इतनी केंद्रित और सुझाव के प्रति खुली हो जाती है कि वह अपने अतीत की घटनाओं को फिर से अनुभव कर सकता है। जब यह "रिग्रेशन" वर्तमान जन्म से आगे बढ़कर कथित पिछले जन्मों तक पहुँचता है, तो इसे पिछले जन्म का सम्मोहन कहा जाता है। इस दौरान व्यक्ति विस्तृत दृश्य, भावनाएँ, ध्वनियाँ और शारीरिक संवेदनाएँ अनुभव कर सकता है, जो किसी अन्य समय और स्थान से जुड़ी होती हैं। माना जाता है कि इन अनुभवों से मुक्त होकर व्यक्ति वर्तमान के डर, फोबिया, अस्पष्ट दर्द, या रिश्तों की समस्याओं से छुटकारा पा सकता है।
इतिहास
सम्मोहन के माध्यम से अतीत में लौटने की अवधारणा पुरानी है, लेकिन पिछले जन्म के सम्मोहन को एक लोकप्रिय चिकित्सा पद्धति बनाने का श्रेय कुछ महत्वपूर्ण व्यक्तियों को जाता है।
- मोरे बर्नस्टीन (Morey Bernstein): सन १९५२ में, अमेरिकी व्यवसायी बर्नस्टीन ने एक महिला "रूथ सिमंस" (जिनका मंच नाम "ब्राइडी मर्फी" था) पर सम्मोहन किया। इस दौरान उन्होंने आयरलैंड के १९वीं सदी के जीवन का विस्तृत वर्णन किया। इस मामले पर लिखी गई किताब द सर्च फॉर ब्राइडी मर्फी ने पश्चिमी दुनिया में पिछले जन्म के सम्मोहन की चर्चा को एक नया आयाम दिया।
- ब्रायन वीस (Brian Weiss): एक प्रशिक्षित मनोचिकित्सक, डॉ. वीस ने अपनी रूढ़िवादी चिकित्सा पद्धति को तब बदल दिया जब उनकी एक मरीज "कैथरीन" ने सम्मोहन में पिछले जन्मों के विवरण दिए, जिससे उसकी गंभीर चिंता और फोबिया ठीक हो गए। उनकी पुस्तक मैनी लाइव्स, मैनी मास्टर्स (१९८८) ने इस विषय को वैज्ञानिक और चिकित्सीय दृष्टिकोण से प्रस्तुत करते हुए दुनिया भर में अत्यधिक लोकप्रिय बनाया।
- माइकल न्यूटन (Michael Newton): डॉ. न्यूटन ने पिछले जन्मों से आगे बढ़कर लाइफ बिटवीन लाइव्स (LBL) यानी "जन्मों के बीच के जीवन" की खोज पर काम किया। उन्होंने सम्मोहन के दौरान लोगों द्वारा बताए गए आत्मा की दुनिया, गाइड्स, और जन्म चुनने की प्रक्रिया के विवरण अपनी पुस्तकों जर्नी ऑफ सोल्स में दर्ज किए।
- डोलोरेस कैनन (Dolores Cannon): कैनन ने "क्यूओरेक्टिव हिप्नोसिस" नामक एक गहरी सम्मोहन तकनीक विकसित की। उन्होंने हजारों सत्रों के दौरान प्राप्त जानकारी को लिपिबद्ध किया, जिसमें पृथ्वी के इतिहास, ब्रह्मांडीय ज्ञान और आत्मा की यात्रा के बारे में विस्तृत विवरण शामिल हैं। उनकी पुस्तकें भारत समेत दुनिया भर में पढ़ी जाती हैं।
कार्यप्रणाली
एक सामान्य पिछले जन्म सम्मोहन सत्र में निम्नलिखित चरण शामिल होते हैं:
- पूर्व-चर्चा: चिकित्सक व्यक्ति की समस्या, उसकी अपेक्षाएँ और सम्मोहन की प्रक्रिया को समझाता है।
- आरम्भ और विश्राम: व्यक्ति को आरामदायक स्थिति में बैठाया या लिटाया जाता है। फिर श्वास, कल्पना और सुझाव के माध्यम से गहरी शारीरिक व मानसिक विश्राम की अवस्था में ले जाया जाता है।
- प्रेरणा: चिकित्सक व्यक्ति को मौखिक सुझाव देकर उसे समय में पीछे ले जाता है – पहले वर्तमान जीवन की एक खुशनुमा याद, फिर बचपन, जन्म, और अंततः उस समय से पहले के एक महत्वपूर्ण क्षण तक।
- अनुभव और अन्वेषण: व्यक्ति जो कुछ देखता, महसूस करता या सुनता है, उसे बोलकर बताता है। चिकित्सक उसका मार्गदर्शन करते हुए उस घटना या जीवनकाल से जुड़े भावनात्मक आवेश को मुक्त करने में सहायता करता है।
- समापन और एकीकरण: सत्र के अंत में, व्यक्ति को वर्तमान में वापस लाया जाता है। उसके अनुभवों पर चर्चा की जाती है और वर्तमान जीवन में उनकी प्रासंगिकता समझाई जाती है।
प्रकार
रिग्रेशन हिप्नोसिस के मुख्य प्रकार हैं:
- आयु रिग्रेशन (एज रिग्रेशन): इसमें व्यक्ति को केवल वर्तमान जन्म के अतीत में, अक्सर बचपन या शैशवावस्था में ले जाया जाता है। इसका उपयोग दबी हुई यादों, बचपन के आघात या मनोवैज्ञानिक समस्याओं के मूल कारण को ढूंढने के लिए किया जाता है।
- पिछले जन्म का रिग्रेशन (पास्ट लाइफ रिग्रेशन): यह सबसे प्रचलित प्रकार है, जिसमें व्यक्ति के कथित पिछले जन्मों का अन्वेषण किया जाता है। माना जाता है कि पिछले जन्म के अनसुलझे आघात, डर या संबंध वर्तमान जीवन को प्रभावित करते हैं।
- जन्मों के बीच का जीवन (लाइफ बिटवीन लाइव्स - LBL): यह माइकल न्यूटन द्वारा विकसित एक गहन प्रक्रिया है, जिसमें व्यक्ति को मृत्यु के बाद और अगले जन्म से पहले के अनुभवों तक ले जाया जाता। इसमें आत्मा की दुनिया, शिक्षा, और जीवन पाठ्यक्रम चुनने जैसे विषय शामिल होते हैं।
वैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य
पारंपरिक विज्ञान और मनोविज्ञान की मुख्यधारा पिछले जन्म के सम्मोहन को स्वीकार नहीं करती। वैज्ञानिक आलोचकों का मानना है कि सम्मोहन की अवस्था में दिमाग अत्यंत सृजनात्मक और सुझाव के प्रति संवेदनशील होता है। इस दौरान अनुभव किए गए दृश्य क्रिप्टोमनेसिया (भूली हुई यादों का उभरना), कल्पना, सांस्कृतिक कथाओं, फिल्मों, किताबों से प्राप्त जानकारी और चिकित्सक के सुझावों का मिश्रण हो सकते हैं। इसे झूठी याद (फॉल्स मेमोरी) का एक रूप भी माना जाता है। हालाँकि, कुछ शोधकर्ता जैसे कि डॉ. इयान स्टीवेन्सन ने पिछले जन्मों के सहज स्मरण के मामलों का विस्तृत अध्ययन किया है, जिससे इस विषय पर बहस जारी है।
पुनर्जन्म शोध
भारतीय उपमहाद्वीप में पुनर्जन्म की अवधारणा हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख धर्मों का अभिन्न अंग रही है। यहाँ पुनर्जन्म शोध को गंभीरता से लिया गया है। अमेरिकी मनोचिकित्सक डॉ. इयान स्टीवेन्सन ने दशकों तक भारत, श्रीलंका और पाकिस्तान सहित कई देशों में उन बच्चों के मामलों का अध्ययन किया, जो स्वतः ही अपने पिछले जन्म का विवरण देते थे। उन्होंने जन्मचिह्नों और जन्मदोषों को पिछले जन्म की मृत्यु के घावों से जोड़कर देखा। भारत में, दिल्ली यूनिवर्सिटी के डॉ. सत्यवंत पासरिचा और यू.एस.ए. के डॉ. जिम टकर जैसे शोधकर्ताओं ने इस क्षेत्र में काम जारी रखा है। पाकिस्तान में भी, खासकर सिंध और पंजाब के ग्रामीण इलाकों में, पुनर्जन्म की स्वतः स्मरण की घटनाएँ सामने आती रहती हैं और स्थानीय मीडिया में चर्चा का विषय बनती हैं।
भारत और पाकिस्तान में अभ्यास
भारत और पाकिस्तान में, जहाँ पुनर्जन्म की अवधारणा धार्मिक मान्यता का हिस्सा है, वहाँ पिछले जन्म के सम्मोहन का रुख द्वैधापूर्ण है। एक ओर, कई लोग इसे आध्यात्मिक खोज और चिकित्सा का एक वैध मार्ग मानते हैं। दूसरी ओर, कुछ धार्मिक विद्वान इसे खतरनाक मानते हैं, क्योंकि उनका मानना है कि यह व्यक्ति को अप्रमाणित अनुभवों और संभावित रूप से नकारात्मक ऊर्जाओं के प्रति खोल सकता है।
भारत में मुंबई, दिल्ली, बैंगलोर, चेन्नई जैसे महानगरों में कई प्रशिक्षित सम्मोहन चिकित्सक सक्रिय हैं। डॉ. नीना एस. राठौड़ (मुंबई), डॉ. नंदिनी सरदाना, और डॉ. (स्व.) ब्रजेश कुमार जैसे नाम इस क्षेत्र में जाने जाते हैं। कई आध्यात्मिक गुरु और योग प्रशिक्षक भी मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। पाकिस्तान में, कराची, लाहौर और इस्लामाबाद में कुछ चिकित्सक इस सेवा को प्रदान करते हैं, हालाँकि यह पश्चिम की तुलना में एक उभरता हुआ क्षेत्र है। सामाजिक रूप से, शहरी, शिक्षित वर्ग इसके प्रति अधिक उत्सुक दिखाई देता है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक पुनर्जन्म की मान्यताएँ ही प्रबल हैं।
कानूनी और नैतिक विचार
भारत और पाकिस्तान में पिछले जन्म के सम्मोहन के अभ्यास को नियंत्रित करने वाला कोई विशिष्ट कानून नहीं है। यह एक अनियमित क्षेत्र है। इसलिए, नैतिक चुनौतियाँ महत्वपूर्ण हैं:
- योग्यता: चिकित्सक का उचित प्रशिक्षण और अनुभव होना चाहिए। किसी भी व्यक्ति द्वारा इसे खेल या मनोरंजन के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
- सहमति: व्यक्ति को प्रक्रिया के जोखिमों और लाभों के बारे में पूरी जानकारी देकर उसकी स्पष्ट सहमति लेनी चाहिए।
- भेद्यता: सम्मोहन की अवस्था में व्यक्ति अत्यंत संवेदनशील होता है। चिकित्सक द्वारा किसी भी प्रकार का दुरुपय