सम्मोहन
सम्मोहन
सम्मोहन (अंग्रेजी: Hypnosis) एगो मानसिक अवस्था आ तकनीक हवे जेमें एकरो व्यक्ति के फोकस, ध्यान आ सुझाव के ग्रहणशीलता में बढ़ोतरी हो जाला। ई अवस्था में व्यक्ति के चेतना बदलल रहे ला, जवना से ओकरा के सुझाव देवे में आसानी हो जाला आ ओह सुझाव के अनुसार ओकरा के व्यवहार, भावना, विचार आ शारीरिक अनुभूति में परिवर्तन लावल जा सके ला। सम्मोहन के प्रयोग आमतौर पर चिकित्सा, मनोविज्ञान आ व्यक्तिगत विकास खातिर कइल जाला। भारत आ नेपाल में ई विधि प्राचीन समय से ध्यान आ तपस्या के रूप में प्रचलित रहल बा, हालाँकि आधुनिक रूप में एकरा के चिकित्सकीय आ मनोवैज्ञानिक उपचार के रूप में अपनावल जा रहल बा।
परिभाषा
सम्मोहन के परिभाषा देवे में विद्वान लोग के बीच कुछ मतभेद बा, मगर सामान्य रूप से एकरा के एगो बदलल चेतना की अवस्था मानल जाला। ई नींद के अवस्था नइखे, बलुक एगो ऐसन ट्रान्स अवस्था हवे जेमें व्यक्ति के आंख खुलल रहे ला आ ओकरा के आसपास के बात के होश बाकी रहे ला, मगर ओकरा ध्यान इतना केंद्रित हो जाला कि ओ सम्मोहन करे वाला (सम्मोहनकार) के सुझाव के प्रति गहराई से प्रतिक्रिया देला। ई अवस्था में व्यक्ति के आलोचनात्मक सोच कम हो जाला आ ओ सुझाव के बिना कौनों सवाल कइले स्वीकार करे लागे ला। सम्मोहन के दौरान स्वैच्छिक सहयोग जरूरी होला; कोनो व्यक्ति के बिना ओकरा इच्छा के सम्मोहित नइखे कइल जा सके।
इतिहास
वैश्विक परिप्रेक्ष्य
सम्मोहन के आधुनिक इतिहास के शुरुआत 18वीं सदी में फ्रांज एंटन मेसमर नामक ऑस्ट्रियाई चिकित्सक से भइल, जे "पशु चुंबकत्व" (मैस्मेरिज्म) के सिद्धांत दिहलें। हालाँकि, ओकरा के विधि के वैज्ञानिक मान्यता ना मिलल, बाकी ओही से सम्मोहन के अध्ययन के शुरुआत भइल। 19वीं सदी में जेम्स ब्रेड नामक सर्जन पहिलका व्यक्ति रहलें जिनका "हिप्नोटिज्म" शब्द के प्रयोग कइलें आ एकरा के "न्यूरो-हिप्नोलॉजी" के रूप में वैज्ञानिक अध्ययन कइलें। फ्रायड आ एरिक्सन जइसन मनोवैज्ञानिक लोग के काम से सम्मोहन मनोचिकित्सा में एगो महत्वपूर्ण उपकरण बन गइल।
भारतीय उपमहाद्वीप में इतिहास आ संदर्भ
भारत आ नेपाल के संस्कृति में सम्मोहन जइसन अवस्था के अवधारणा नया नइखे। प्राचीन योग दर्शन में ध्यान (मेडिटेशन) आ समाधि के जिक्र मिलेला जे सम्मोहन के ट्रान्स अवस्था से मिलत-जुलत बा। तांत्रिक विधि सभ में भी मंत्र जाप आ केंद्रित ध्यान के जरिये मन के अलग-अलग अवस्था में पहुँचल के उल्लेख बा। मध्यकालीन भारत में सिद्ध आ योगी लोग समाधि अवस्था में शारीरिक आ मानसिक नियंत्रण के कमाल के उदाहरण प्रस्तुत कइले बाड़ें। आधुनिक काल में, भारत में सम्मोहन के चिकित्सकीय उपयोग के शुरुआत 20वीं सदी के शुरुआत में भइल, जब कुछ चिकित्सक लोग पश्चिमी विधि के अध्ययन कइले आ एकरा के भारतीय परिप्रेक्ष्य में ढालल।
नेपाल में, विशेष रूप से हिमालयी क्षेत्र में, बौद्ध भिक्षु लोग के ध्यान विधि आ तिब्बती चिकित्सा पद्धति में मन के गहिरा अवस्था में प्रवेश करे के तकनीक प्रचलित रहल बा। ई सभ परंपरा सम्मोहन के मनोवैज्ञानिक सिद्धांत से अनजाने में ही ओकरा से जुड़ल बा।
प्रकार
सम्मोहन के कई प्रकार बाड़ें, जिनहन के उद्देश्य आ विधि के आधार पर बाँटल जा सके ला:
- पारंपरिक प्रत्यक्ष सम्मोहन: इसमें सम्मोहनकार सीधा आदेश देला आ व्यक्ति ओकरा के मान लेला। ई विधि में अक्सर "नींद आवे" जइसन शब्द के प्रयोग होला।
- एरिक्सोनियन सम्मोहन: अमेरिकी मनोचिकित्सक मिल्टन एरिक्सन द्वारा विकसित ई विधि में अप्रत्यक्ष सुझाव, कहानी आ रूपक के इस्तेमाल होला। ई विधि भारत में कई चिकित्सक अपनावत बाड़ें काहें से कि ई सुझाव देेे के जबरदस्ती वाला तरीका नइखे।
- स्व-सम्मोहन: इसमें व्यक्ति खुद के सम्मोहित करे ला। ई तकनीक तनाव प्रबंधन आ आत्मविश्वास बढ़ावे में बहुत प्रभावी मानल जाला। भारत में ई योग निद्रा आ ऑटोजेनिक ट्रेनिंग से मिलत-जुलत बा।
- क्लिनिकल हिप्नोसिस: ई चिकित्सा आ मनोचिकित्सा के क्षेत्र में प्रशिक्षित पेशेवर लोग द्वारा इस्तेमाल कइल जाए वाला सम्मोहन हवे। एकरा के उद्देश्य रोग के इलाज करे होला।
- मंच सम्मोहन: ई मनोरंजन खातिर कइल जाए वाला सम्मोहन हवे, जेकरा में सम्मोहनकार दर्शक सभ के सम्मोहित कर के ओकरा से मनोरंजक काम करावेला। भारत आ नेपाल के कई शहर सभ में ई देखे के मिल जाला।
- प्रतिगमन सम्मोहन: ई एगो विशेष प्रकार के सम्मोहन हवे जेमें व्यक्ति के अतीत में, कई बेर त पिछला जनम में भी, ले जाइल जाला। ई विधि के इस्तेमाल अक्सर मनोवैज्ञानिक समस्या के मूल कारण पता लगावे खातिर कइल जाला।
वैज्ञानिक अनुसंधान
सम्मोहन पर भारत आ विदेश में कई गो वैज्ञानिक अध्ययन भइल बा। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) आ अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) जइसन संस्थान सभ में सम्मोहन के मस्तिष्क पर प्रभाव के अध्ययन कइल गइल बा। कार्यात्मक चुंबकीय अनुनाद इमेजिंग (fMRI) आ इलेक्ट्रोएन्सेफलोग्राम (EEG) जइसन तकनीक से पता चलल बा कि सम्मोहन के अवस्था में मस्तिष्क के कुछ खास हिस्सा सक्रिय हो जाला, जइसे कि अनुगामी नाभिक (सबजेक्टिव अनुभूति से जुड़ल) आ पूर्वकाल सिंगुलेट कॉर्टेक्स (ध्यान से जुड़ल)।
वैज्ञानिक शोध ई बतावेला कि सम्मोहन दर्द निवारण (हिप्नोएनेल्जेसिया), चिंता, अवसाद, पोस्ट-ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD), आदत में बदलाव (जइसे कि धूम्रपान छोड़े) आ मनोदैहिक रोग सभ के इलाज में प्रभावी हो सके ला। भारत में, भारतीय मनोविज्ञान परिषद आ राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य तंत्रिका विज्ञान संस्थान (NIMHANS) जइसन संस्था सम्मोहन के चिकित्सकीय उपयोग पर शोध के संचालन करे ली।
अनुप्रयोग
भारत आ नेपाल में सम्मोहन के अनुप्रयोग बहुत विविध बा:
- चिकित्सा क्षेत्र: दंत चिकित्सा में दर्द से राहत देवे, सर्जरी के दौरान बेहोशी के विकल्प के रूप में, कैंसर के मरीजन के दर्द आ उल्टी के मतली कम करे में, आ चर्म रोग सभ में।
- मनोचिकित्सा: फोबिया, तनाव, अनिद्रा, यौन समस्या, आ व्यक्तित्व विकार सभ के इलाज में। प्रतिगमन सम्मोहन के इस्तेमाल अक्सर पिछला दर्दनाक अनुभव के उपचार खातिर होला।
- व्यक्तिगत विकास: आत्मविश्वास बढ़ावे, सार्वजनिक बोलजबानी में सुधार, परीक्षा के तनाव कम करे, आ खेलकूद में प्रदर्शन बढ़ावे खातिर।
- आदत नियंत्रण: धूम्रपान, शराबखोरी, जुआ आ अधिक खाए के आदत छुड़ावे में।
- शिक्षा: सीखे की क्षमता बढ़ावे आ याददाश्त मजबूत करे में।
- फोरेंसिक जांच: कुछ मामला में, पुलिस गवाह सभ के याददाश्त बढ़ावे खातिर सम्मोहन के मदद लेले, हालाँकि ई विवादास्पद बा।
भारत आ नेपाल में कानूनी दर्जा
भारत में, सम्मोहन के कानूनी दर्जा स्पष्ट रूप से परिभाषित नइखे। भारतीय चिकित्सा परिषद (MCI) सम्मोहन के चिकित्सा पद्धति के रूप में मान्यता देवे ला, बशर्ते कि ओकरा के प्रयोग नैदानिक मनोविज्ञान या मनोचिकित्सा में प्रशिक्षित आ पंजीकृत चिकित्सक द्वारा कइल जाय। मनोरंजन के लिए मंच सम्मोहन पर कोनो प्रतिबंध नइखे, मगर ओकरा में दर्शक सभ के शोषण ना हो, ई सुनिश्चित करे के जिम्मेदारी सम्मोहनकार पर बा। भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत बिना सहमति के सम्मोहन करे पर मुकदमा चल सके ला।
नेपाल में, स्वास्थ्य सेवा विनियमन में सम्मोहन के स्पष्ट उल्लेख कम बा। ई केवल लाइसेंस प्राप्त चिकित्सक या मनोवैज्ञानिक द्वारा चिकित्सा के संदर्भ में इस्तेमाल कइल जाए तब स्वीकार्य मानल जाला। नेपाल सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय आ नेपाल मेडिकल काउंसिल ई निर्धारित करे ली कि कोन व्यक्ति ई सेवा प्रदान कइल के योग्य बा।
सांस्कृतिक रवैया
भारतीय समाज में सम्मोहन के प्रति रवैया मिलाजुला बा। एक ओर, ई के वैज्ञानिक चिकित्सा पद्धति के रूप में स्वीकार कइल जा रहल बा, दूसरी ओर कई लोग एकरा के जादू-टोना, भूत-प्रेत या अलौकिक शक्ति से जोड़ के देखे ला। टीवी शो आ फिलिम सभ में सम्मोहन के गलत चित्रण से ई भ्रम बढ़ल बा। ग्रामीण इलाका में, सम्मोहन जइसन अवस्था के अक्सर झाड़-फूंक करे वाला ओझा या तांत्रिक लोग से जोड़ के देखल जाला।
नेपाल में, विशेष रूप से हिन्दू आ बौद्ध संस्कृति के प्रभाव से, ध्यान आ ट्रान्स अवस्था के सकारात्मक दृष्टि से देखल जाला। मगर ईहो भ्रम बा कि सम्मोहन से व्यक्ति के दिमाग कमजोर हो जाला या ओकर