हिप्नोसिस
हिप्नोसिस
हिप्नोसिस एगो मानसिक अवस्था आरू एगो तकनीक होवे जेहन मा सुझाव की क्षमता (suggestibility), केंद्रित ध्यान, आरू कल्पना की क्षमता बढ़ जाये। ई एक तरह की ट्रान्स जैसन अवस्था होवे, जेहन मा व्यक्ति आराम आरू गहिरा ध्यान महसूस करेला। ई अवस्था मा, व्यक्ति अपन अवचेतन मन (subconscious mind) से जुड़ल रहेला आरू सकारात्मक सुझाव ले सकेला। भारत मा, हिप्नोसिस के इलाज, मनोरंजन, आरू आत्म-सुधार खातिर इस्तेमाल करल जाला।
परिभाषा
हिप्नोसिस एगो ऐसन अवस्था होवे जेहन मा व्यक्तिका चेतना के स्तर बदल जाये। ई नींद ना हवे, बल्कि एगो केंद्रित विश्राम हवे। ई अवस्था मा, व्यक्तिका आलोचनात्मक सोच (critical thinking) कम हो जाये आरू अवचेतन मन खुल जाये। हिप्नोटिस्ट (hypnotist) लोग शब्द, छवि, आरू सुझाव के इस्तेमाल करी कि व्यक्ति के ई अवस्था मा ले जा सके। हिप्नोसिस के मुख्य लक्षण होवे: ध्यान केंद्रित करे की क्षमता, शरीर आराम, आरू सुझाव ले सकना। भारतीय संदर्भ मा, ई अवस्था ध्यान (meditation) आरू समाधि से कुछ मिलत-जुलत हवे, मगर ई अलग तकनीक हवे।
इतिहास
वैश्विक इतिहास
दुनिया भर मा, हिप्नोसिस के इतिहास प्राचीन काल से चलत आ रहल बा। प्राचीन मिस्र, ग्रीस, आरू भारत मा मंदिर नींद (temple sleep) आरू धार्मिक समाधि के तरीका हिप्नोसिस जैसन रहल। 18वीं सदी मा, जर्मन चिकित्सक फ्रांज एंटन मेसमर न "एनिमल मैग्नेटिज्म" के सिद्धांत दिहलस, जेकरा आधुनिक हिप्नोसिस के नींव मानल जाला। 19वीं सदी मा, स्कॉटिश सर्जन जेम्स ब्रेड न "हिप्नोसिस" शब्द के इस्तेमाल कइलस आरू ई बतवलस कि ई एगो मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया हवे।
भारत मा इतिहास आरू स्थानीय विकास
भारत मा, हिप्नोसिस के अवधारणा प्राचीन योग दर्शन आरू तंत्र साधना से जुड़ल बा। ध्यान, त्राटक (किसी बिंदु पर टकटकी लगाके), आरू मंत्र जाप के प्रथा मा हिप्नोटिक तत्व मौजूद रहल। आधुनिक भारत मा हिप्नोसिस के शुरुआत 20वीं सदी मा भइल। डॉ. एन. एस. कृष्णन, डॉ. जे. एम. झा आरू डॉ. बी. एम. हेगड़े जैसन चिकित्सक लोग हिप्नोथेरेपी के प्रचार कइलस। 1970 आरू 1980 के दशक मा, डॉ. बी. एन. गंगाधरन आरू डॉ. एस. डी. वाडिया न हिप्नोसिस के चिकित्सा क्षेत्र मा लोकप्रिय बनवलस।
भारत मा, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन आरू इंडियन साइकियाट्रिक सोसाइटी हिप्नोसिस पर चर्चा करे लगल। 1990 मा, इंडियन सोसाइटी ऑफ क्लिनिकल एंड एक्सपेरिमेंटल हिप्नोसिस (ISCEH) के गठन भइल, जे हिप्नोसिस के प्रशिक्षण आरू शोध के बढ़ावा देवेला। आज, भारत मा कई मेडिकल कॉलेज आरू मनोविज्ञान संस्थान हिप्नोथेरेपी पर कोर्स आरू वर्कशॉप चलावेला।
प्रकार
हिप्नोसिस के कई प्रकार होवे, जे उद्देश्य आरू तकनीक पर निर्भर करेला।
- पारंपरिक हिप्नोसिस (Direct Hypnosis): ई मा, हिप्नोटिस्ट सीधा आदेश आरू सुझाव देला, जेहन मा व्यक्ति से कहल जाला कि ऊ नींद महसूस करत बा या आराम करत बा।
- एरिक्सोनियन हिप्नोसिस: अमेरिकी मनोचिकित्सक मिल्टन एरिक्सन द्वारा विकसित ई तकनीक मा, कहानी, रूपक (metaphor), आरू अप्रत्यक्ष सुझाव के इस्तेमाल होला। ई भारत मा लोकप्रिय हवे काहें कि ई कहानी सुनावे की परंपरा से मेल खायेला।
- स्व-हिप्नोसिस (Self-Hypnosis): ई मा, व्यक्ति खुद के हिप्नोटिक अवस्था मा ले जाला, अक्सर रिकॉर्डिंग या सीखल गइल तकनीक से। ई तनाव प्रबंधन आरू आत्मविश्वास बढ़ावे खातिर उपयोगी हवे।
- रिग्रेशन हिप्नोसिस: ई एगो विवादास्पद तकनीक हवे जेहन मा व्यक्ति के अतीत, कभी-कभी बचपन या पिछला जनम मा ले जाए के कोशिश करल जाला। भारत मा, कुछ चिकित्सक ई इस्तेमाल करेला, मगर ई वैज्ञानिक रूप से पूरी तरह स्वीकार नइखे भइल।
- एनएलपी (न्यूरो-लिंग्विस्टिक प्रोग्रामिंग): ई हिप्नोसिस आरू भाषा के मिश्रण हवे जे व्यवहार परिवर्तन खातिर इस्तेमाल होला। भारत मा एनएलपी वर्कशॉप बहुत लोकप्रिय हवे।
वैज्ञानिक शोध
हिप्नोसिस पर बहुत वैज्ञानिक शोध भइल बा। फंक्शनल मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (fMRI) आरू इलेक्ट्रोएन्सेफलोग्राम (EEG) के अध्ययन दिखवले बा कि हिप्नोटिक ट्रान्स मा, दिमाग के कुछ हिस्सा (जइसे कि एंटीरियर सिंगुलेट कॉर्टेक्स) अलग तरह से सक्रिय हो जाला। ई बतावेला कि हिप्नोसिस एगो वास्तविक न्यूरोलॉजिकल अवस्था हवे।
भारत मा, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंसेज (NIMHANS), आरू कई मेडिकल विश्वविद्यालय हिप्नोसिस पर शोध करेला। शोध बतावेला कि हिप्नोसिस दर्द प्रबंधन (कैंसर, डिलीवरी), चिंता, अवसाद, धूम्रपान छुड़ावे, आरू पाचन संबंधी समस्या (इर्रिटेबल बॉवेल सिंड्रोम) मा मददगार हो सकेला। मगर, ई सबके खातिर राम्मर इलाज ना हवे आरू क्वालिफाइड चिकित्सक के देखरेख मा होवे के चाहीं।
अनुप्रयोग
भारत मा हिप्नोसिस के कई क्षेत्र मा इस्तेमाल होवेला:
- चिकित्सा हिप्नोथेरेपी: दर्द नियंत्रण, मनोदैहिक रोग (psychosomatic disorders), नींद न आवे की समस्या (insomnia), आरू वजन प्रबंधन मा।
- मनोचिकित्सा: भय (phobia), तनाव, PTSD, आरू आदत में बदलाव (जइसे कि नाखून चबावे) खातिर।
- दंत चिकित्सा: डेंटिस्ट लोग कुछ मरीज के दर्द आरू चिंता कम करे खातिर हिप्नोसिस इस्तेमाल करेला।
- शिक्षा आरू खेल: एकाग्रता बढ़ावे, परीक्षा का डर कम करे, आरू खिलाड़ी लोग के प्रदर्शन सुधारे खातिर।
- मनोरंजन: स्टेज हिप्नोसिस शो बहुत लोकप्रिय हवे, मगर ई सिर्फ मनोरंजन खातिर होवे आरू इलाज ना हवे।
- आध्यात्मिक विकास: कुछ योग आरू ध्यान केंद्र लोग हिप्नोसिस के तकनीक आत्म-अन्वेषण आरू आंतरिक शांति खातिर इस्तेमाल करेला।
भारत मा कानूनी स्थिति
भारत मा, हिप्नोसिस के कानूनी दर्जा स्पष्ट नइखे। भारतीय चिकित्सा परिषद (MCI) हिप्नोसिस के क्वालिफाइड डॉक्टर लोग द्वारा इलाज के तौर पर इस्तेमाल करे के अनुमति देवेला। मनोचिकित्सक, मनोवैज्ञानिक, आरू कुछ सामान्य चिकित्सक जे प्रशिक्षण लिहल होखे, ओ हिप्नोथेरेपी कर सकेला।
मगर, हिप्नोसिस के अभ्यास करे खातिर कोई एक केंद्रीय लाइसेंस नइखे। कई राज्य मा, जादू-टोना निवारण अधिनियम के तहत गलत तरीका से हिप्नोसिस के इस्तेमाल के खिलाफ कार्रवाई हो सकेला। इंडियन सोसाइटी ऑफ क्लिनिकल एंड एक्सपेरिमेंटल हिप्नोसिस (ISCEH) जैसन संस्था प्रमाणपत्र देले, मगर ई कानूनी रूप से अनिवार्य नइखे। जनता के सलाह दिहल जाला कि ओ सिर्फ प्रमाणित चिकित्सा पेशेवर लोग से ही हिप्नोथेरेपी लिहन।
सांस्कृतिक रवैया
भारतीय समाज मा हिप्नोसिस के प्रति रवैया मिला-जुला हवे। एक तरफ, शहरी इलाका मा शिक्षित लोग ई के वैज्ञानिक चिकित्सा पद्धति के रूप मा स्वीकार करेला। दूसरा तरफ, ग्रामीण आरू अर्ध-शहरी इलाका मा, कई लोग हिप्नोसिस के जादू-टोना, भूत-प्रेत, या झाड़-फूंक से जोड़ के देखेला।
भारत के आध्यात्मिक परंपरा के कारण, कई लोग हिप्नोसिस के ध्यान आरू योग निद्रा के समकक्ष मानेला, जेकरा चलते ई के स्वीकार्यता बढ़ल बा। मगर, स्टेज शो आरू टीवी कार्यक्रम हिप्नोसिस के गलत छवि देला, जेहन मा लोग के नियंत्रण करे के दिखावल जाला। ई कारण, डर आरू संदेह पैदा हो जाला। धार्मिक नेता लोग कभी-कभी हिप्नोसिस के आध्यात्मिक प्रथासे भटकाव मानेला, त कभी स्वीकार करेला।
भारत के कुछ प्रसिद्ध व्यवसायी
भारत मा हिप्नोसिस के क्षेत्र मा कई प्रमुख व्यक्ति योगदान दिहल बा:
- डॉ. बी. एन. गंगाधरन: इनकरा "भारत के हिप्नोसिस के जनक" मानल जाला। ओ कई किताब लिखलस आरू ISCEH के संस्थापक मे से एक रहल।
- डॉ. एस. डी. वाडिया: ओ मुंबई मा हिप्नोथेरेपी के प्रचार कइलस आरू कई चिकित्सक के प्रशिक्षण दिहलस।
- डॉ. लीना जे. भाटे: ओ मुंबई मा सक्रिय बा आरू हिप्नोसिस के मनोचिकित्सा मा इस्तेमाल पर जोर देवेली।
- डॉ. नरेश वर्मा: दिल्ली मा सक्रिय, ओ हिप्नोसिस के माध्यम से दर्द प्रबंधन पर काम करेला।
- डॉ. अरुणा गुप्ता: ओ बेंगलुरु मा काम करेली आरू हिप्नो