प्रतिगमन सम्मोहन
प्रतिगमन सम्मोहन (अंग्रेजी: Regression Hypnosis) एगो सम्मोहन क विधि हवे जेकरा में व्यक्ति के अवचेतन मन के गहिराई में ले जाइकै के प्रयास कइल जाला आ ओकरा पुराना यादवारी, खासकर बचपन के अनुभव या पूर्व जन्म के यादवारी (Past Life Regression - PLR) के अनुभव करावल जाला। ई एक प्रकार के सम्मोहन हवे जेकरा उपचारात्मक (थेरेप्यूटिक) आ खोजी (एक्सप्लोरेटरी) दुनू उद्देश्य से इस्तेमाल होला। भारत में, जहाँ पुनर्जन्म के मान्यता सांस्कृतिक आ धार्मिक विश्वास में गहिराई से जुड़ल बा, ई विधि खासा रुचि आ बहस के विषय बनल बा।
परिभाषा
प्रतिगमन सम्मोहन एगो ऐसन प्रक्रिया हवे जेमें सम्मोहन के तकनीक के इस्तेमाल करी क व्यक्ति के मानसिक अवस्था के ओह समय में "वापस ले जावल" (regress) जाला जब ओकर शरीर आ उमिर अलग रहल। ई दू प्रकार के होला: आयु प्रतिगमन (Age Regression) आ पूर्व जन्म प्रतिगमन (Past Life Regression)। आयु प्रतिगमन में व्यक्ति के ओकरा अपने बचपन या जवानी के कौनों घटना में वापस ले जावल जाला, जबकि पूर्व जन्म प्रतिगमन में ई दावा कइल जाला कि व्यक्ति ओकरा मानल जाए वाला पिछला जन्म के अनुभव करेला। ई प्रक्रिया आमतौर पर एगो प्रशिक्षित चिकित्सक या सम्मोहनकार (हिप्नोथेरेपिस्ट) द्वारा नियंत्रित वातावरण में करावल जाला।
इतिहास
आधुनिक प्रतिगमन सम्मोहन के इतिहास कई लोग से जुड़ल बा। मोरे बर्नस्टाइन (Morey Bernstein) के नाँव प्रमुखता से लिहल जाला काहें कि ओनकर 1956 के किताब "द सर्च फॉर ब्राइडी मर्फी" (The Search for Bridey Murphy) में एगो महिला के पूर्व जन्म के कहानी के बर्णन कइल गइल, जेकरा चलते ई विषय पच्छिमी दुनिया में चर्चा में आइल। बाद में, ब्रायन वीस (Brian Weiss) नाँव के एगो अमेरिकी मनोचिकित्सक, जे पेशा से एगो पारंपरिक डॉक्टर रहलें, ओनकर किताब "मेनी लाइव्स, मेनी मास्टर्स" (1988) से बहुत प्रसिद्ध भइलें। ओकरा अनुभव रहल कि एगो मरीज के सम्मोहन के दौरान पूर्व जन्म के यादवारी सामने आइल जे ओकरा मौजूदा मानसिक समस्या के ठीक करे में मददगार रहल।
माइकल न्यूटन (Michael Newton) एगो अउरी महत्वपूर्ण हस्ती रहलें जे जीवन के बीच लाइफ (Life Between Lives - LBL) सम्मोहन के विकास खातिर जानल जालें। ई विधि में व्यक्ति के ओकरा मानल जाए वाला पुनर्जन्म के बीच के अवस्था, यानी आत्मा के दुनिया, में ले जावल जाला। डोलोरेस कैनन (Dolores Cannon) नाँव के एगो अमेरिकी सम्मोहन चिकित्सक रहली जे क्यूएचएचटी (QHHT - Quantum Healing Hypnosis Technique) नाँव के एगो तकनीक विकसित कइली। ओकरा दावा रहल कि ई विधि से ना सिर्फ पूर्व जन्म, बल्कि "उच्च आत्मा" या "अवचेतन मन" से सीधा संवाद हो सकेला।
कार्यप्रणाली
प्रतिगमन सम्मोहन के सत्र आमतौर पर एगो शांत आ आरामदायक कमरा में होला। चिकित्सक व्यक्ति के आराम से बैठा या लेटा के सम्मोहन अवस्था में ले जाला, जेकरा खातिर विश्राम तकनीक, श्वास पर ध्यान आ एकाग्रता के निर्देश दिहल जाला। जब व्यक्ति गहिरा सम्मोहन (ट्रान्स) में होला, तब चिकित्सक ओकरा समय पीछे ले जाए के निर्देश देवेला, जइसे कि "अब आप दस साल के हो गइल बाड़ी, आप कहाँ बाड़ी?" या फिर "उहाँ समय से पहिले जाईं, जहाँ ई समस्या के शुरुआत भइल रहल।" पूर्व जन्म प्रतिगमन में, निर्देश ई हो सकेला कि "अब आप ओह समय से पहिले जाईं, जहाँ ई भावना पहिली बेर उत्पन्न भइल।" व्यक्ति तब जवाब देवेला, अक्सर विस्तार से घटना के बर्णन करी क या भावना व्यक्त करी क। सत्र के अंत में, चिकित्सक व्यक्ति के वर्तमान में सुरक्षित रूप से वापस ले आवेला आ ओकरा अनुभव पर चर्चा करेला।
प्रकार
- आयु प्रतिगमन (Age Regression): इसमें व्यक्ति के ओकरा अपने ही एह जन्म के बीता समय में ले जावल जाला। मनोचिकित्सा में ई तकनीक कई बेर दबल भावना या दर्दनाक याद (ट्रॉमा) के सामने लावे आ ओकरा समझे-बुझे खातिर इस्तेमाल होला।
- पूर्व जन्म प्रतिगमन (Past Life Regression - PLR): इहो ऊपर बतावल गइल बिधि हवे जेमें व्यक्ति के एह जन्म से पहिले के जीवन के अनुभव करावल जाला। चिकित्सक ई मान के चलेला कि मौजूदा मानसिक, भावनात्मक या कौनों बेर शारीरिक समस्या के जड़ पिछला जन्म में हो सकेला।
- जीवन के बीच लाइफ (Life Between Lives - LBL): ई माइकल न्यूटन द्वारा विकसित एगो विशेष प्रकार के प्रतिगमन हवे। इसमें व्यक्ति के ओकरा मानल जाए वाला मृत्यु आ अगिला जन्म के बीच के आध्यात्मिक दुनिया में ले जावल जाला। ई दावा कइल जाला कि इहाँ आत्मा शिक्षक (स्पिरिचुअल गाइड) से मिलेला, जीवन के सबक समझेला आ अगिला जन्म के योजना बनावेला।
वैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य
वैज्ञानिक समुदाय प्रतिगमन सम्मोहन, खासकर पूर्व जन्म प्रतिगमन, के प्रति बहुत संशयवादी नजरिया रखेला। अधिकांश मुख्यधारा के मनोवैज्ञानिक आ वैज्ञानिक ई मानेला कि सम्मोहन अवस्था में बतावल गइल "पूर्व जन्म" के कहानी असल में व्यक्ति के अवचेतन मन के रचना, कल्पना, भूलल गइल किताब या फिलिम से लिहल जानकारी, आ सामाजिक-सांस्कृतिक विश्वास के मिश्रण हो सकेला। ई झूठी यादवारी (false memory) के उदाहरण हो सकेला। सम्मोहन में व्यक्ति चिकित्सक के सुझाव के प्रति बहुत संवेदनशील हो जाला आ ओकरा इच्छा अनुसार कहानी बना सकेला, भले ही ओकरा एह बात के होश ना होवे। अबतक ले, पूर्व जन्म के अस्तित्व के पुष्टि करे वाला कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नइखे मिलल।
पुनर्जन्म अनुसंधान
भारत आ अन्य कई एशियाई देश में पुनर्जन्म के दावा करे वाला बच्चा के मामिला पर कई बेर अध्ययन भइल बा। डॉ. इयान स्टीवेन्सन (Dr. Ian Stevenson) नाँव के एगो शोधकर्ता के काम अक्सर ई विषय में उद्धृत कइल जाला। ओकरा भारत समेत कई देश में घूमी क ऐसन बच्चा के अध्ययन कइलें जे अपना पिछला जन्म के बारे में विस्तार से बतावत रहल। ओकरा दावा रहल कि कई मामिला में ई बच्चा ऐसन जानकारी दिहलें जेकरा ओकरा सामान्य तरीका से जानल संभव ना रहल। हालाँकि, ओकरा शोध के कड़ा आलोचना भी भइल बा आ ओकरा तरीका आ निष्कर्ष वैज्ञानिक मानक पर खरा ना उतरल बा। भारत में, श्रीमती डी.के. चौहान जइसन लोग ई क्षेत्र में काम कइले बाड़ी, मगर ई शोध मुख्यधारा के विज्ञान से अलग मानल जाला।
भारत में अभ्यास
भारत में, जहाँ हिंदू, बौद्ध, जैन आ सिख धर्म में पुनर्जन्म के मूल अवधारणा हवे, प्रतिगमन सम्मोहन के बिसेस रुचि मिलल बा। कई हिप्नोथेरेपिस्ट आ आध्यात्मिक गुरु ई सेवा देवेला। दिल्ली, मुंबई, बंगलौर, चेन्नई जइसन बड़हन शहर में प्रतिगमन चिकित्सक मिल जाईहें। कुछ लोग एकरा के पारंपरिक आध्यात्मिक साधना, जइसे कि ध्यान (मेडिटेशन) आ संस्कार के साथे जोड़ेला। भारतीय संस्कृति में कर्म आ पुनर्जन्म के सिद्धांत गहिराई से बसल बा, ईइजा एह विधि के लेल उपजाऊ जमीन मिलल बा। लोग अक्सर अपना मौजूदा दुःख, रोग, या रिश्ता में समस्या के कारण पिछला जन्म के कर्म से जोड़ के देखेला आ एही खातिर प्रतिगमन के सहारा लेवेला। हालाँकि, ईहो ध्यान रहे कि सभ भारतीय ई विधि के ना मानेला आ एकरा के वैज्ञानिक नजरिया से देखेला।
कानूनी आ नैतिक विचार
भारत में, प्रतिगमन सम्मोहन के अभ्यास के नियमन करे वाला कोई स्पष्ट कानून नइखे। हिप्नोथेरेपी अक्सर वैकल्पिक चिकित्सा (आल्टरनेटिव थेरेपी) के रूप में देखल जाला। एगो जिम्मेदार चिकित्सक के चाहीं कि ओ:
- अपना सीमा के बतावे आ गंभीर मानसिक रोग (जइसे कि सिजोफ्रेनिया, गहिरा डिप्रेशन) के मामिला में, रेफर करी दे।
- रोगी के सूचित सहमति (informed consent) लिहे, ओकरा प्रक्रिया के संभावित जोखिम आ सीमा के बतावे।
- रोगी के बतावल गइल जानकारी के गोपनीय रखे।
- अपना निष्कर्ष या सुझाव के सावधानी से दे, ताकि रोगी के नुकसान ना होवे।
- ई ना दावा करे कि ई पूर्णतया वैज्ञानिक या चमत्कारी इलाज हवे।
अनैतिक चिकित्सक द्वारा भावनात्मक शोषण, झूठा आशा दिहल, या अफवाह फैजावल के खतरा हमेशा रहेला।